भोजपुर में भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला और परिजनों की प्रतिक्रिया
बिहार के भोजपुर जिले में 28 वर्षीय भरत तिवारी का एनकाउंटर कर दिया गया था, जो अब आठ दिन बीत चुके हैं। इस घटना ने पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी, खासकर जब से परिजनों ने आरोप लगाया कि भरत की हत्या की गई है। घटना के बाद से ही परिवार का कहना है कि जब भरत ने आत्मसमर्पण कर दिया था, तो फिर भी उसे गोली क्यों मारी गई। इस मामले में पुलिस पर हत्या का आरोप लगाते हुए परिजन लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं।
परिजनों का आरोप और पुलिस का जवाब
भरत का एनकाउंटर 17 जून को हुआ था, जिसके बाद उसके परिवार ने पुलिस पर हत्या का आरोप लगाया। परिवार का दावा है कि पुलिस उनके घर आई थी और बेटे को मारने की धमकी भी दी गई थी। भरत की मां का कहना है कि वह बीएससी कर चुका था और नौकरी की तैयारी कर रहा था, साथ ही समाजसेवा में भी जुड़ा था। वह बाढ़ पीड़ितों के हक में आवाज उठा रहा था, लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। इस दौरान उसने हथियार भी उठा लिए थे। परिवार का कहना है कि भरत विस्थापितों के पुनर्वास की मांग कर रहा था, लेकिन उसकी बात किसी अधिकारी या सरकार ने नहीं सुनी।
मुलाकात और न्याय की उम्मीद
घटना के आठ दिन बाद भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) मिस्टर राज भरत के घर परिजनों से मिलने पहुंचे। इस दौरान आरा सदर SDPO-2 रंजीत सिंह, डीएसपी पंकज मिश्रा समेत कई पुलिस अधिकारी भी मौजूद थे। भरत के भाई ने एसपी से सवाल किया कि जब भरत ने पिस्टल फेंक दी थी, तो फिर उसे गोली क्यों मारी गई। परिजनों ने इस एनकाउंटर को लेकर कई गंभीर सवाल किए, जिन पर एसपी ने भरोसा दिलाया कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। हालांकि, भरत के भाई चंदन तिवारी का कहना है कि परिवार अभी भी संतुष्ट नहीं है और आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे हैं।
भरत की मां आशा देवी ने इस पूरे प्रकरण की CBI जांच और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। एसपी ने परिवार को सुरक्षा का भरोसा दिया है, और आशा देवी का मानना है कि सही जांच के बाद ही न्याय मिलेगा। परिवार की बड़ी बहू ने भी कहा कि एसपी ने सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने का भरोसा दिया है। जब मीडिया ने भोजपुर एसपी से इस मामले में सवाल किए, तो वे जवाब देने से बचते नजर आए।









