बिहार में भरत तिवारी एनकाउंटर पर विवाद और राजनीतिक प्रतिक्रिया
बिहार के मंत्री अशोक चौधरी ने स्पष्ट किया कि भरत तिवारी का पुलिस एनकाउंटर पूरी तरह से गलत था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग इस घटना को जातीय रंग देने का प्रयास कर रहे हैं ताकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को घेर सकें। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। इस बीच, भरत तिवारी के परिवार ने पुलिसकर्मियों की गिरफ्तारी, गांव वालों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लेने और सुरक्षा की मांग को लेकर जोर दिया है। इस मामले में पहले ही एफआईआर दर्ज हो चुकी है और जांच प्रक्रिया जारी है।
परिवार की मांग और फर्जी मुकदमों का मामला
शनिवार को भरत तिवारी के परिजनों ने पुलिस अधिकारियों और जवानों की गिरफ्तारी की मांग की। उनका कहना है कि जगदीशपुर के डीएसपी राजेश शर्मा, शाहपुर थाना प्रभारी राजेश कुमार मल्लकर, एसआई अंकित आर्यन और एसटीएफ के जवान अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया जाए। परिवार का यह भी आरोप है कि भरत तिवारी की मां आशा देवी का अनिश्चितकालीन अनशन तब तक जारी रहेगा, जब तक इन पुलिसकर्मियों को गिरफ्तार नहीं किया जाता।
परिजनों ने यह भी मांग की है कि जांच के दौरान आने वाले अधिकारियों को पहले से सूचित किया जाए और गांव वालों पर दर्ज फर्जी मुकदमों को वापस लिया जाए। इसके साथ ही, परिवार को सुरक्षा प्रदान करने की भी जोरदार अपील की गई है।
फेसबुक वीडियो और जांच का वर्तमान स्थिति
यह मामला उस समय और अधिक विवादित हो गया जब घटना से पहले का एक फेसबुक लाइव वीडियो सामने आया। परिवार का दावा है कि वीडियो में भरत तिवारी अपना पिस्तौल पुलिस की ओर फेंकते हुए दिख रहे हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया था। आरोप है कि निहत्थे होने के बावजूद पुलिस ने उन्हें गोली मार दी। हालांकि, भोजपुर पुलिस का कहना है कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर कई राउंड फायरिंग की, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।
परिवार की शिकायत के आधार पर बिहार पुलिस ने जगदीशपुर के डीएसपी, शाहपुर थाना प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। वर्तमान में मामले की जांच चल रही है और पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर बिहार की राजनीति भी गरमाई हुई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने इस घटना पर सवाल उठाए हैं, जिससे यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।











