बांकीपुर उपचुनाव का अंतिम दिन: सड़क पर तेजस्वी यादव और पवन सिंह का आमना-सामना
बांकीपुर उपचुनाव के प्रचार के अंतिम दिन पटना की सड़कों पर तेजस्वी यादव और पवन सिंह के काफिले आमने-सामने आ गए। इस दृश्य ने चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है और राजनीतिक चर्चाओं को नई दिशा दी है। वोटिंग से पहले इस तस्वीर ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि चुनाव का अंतिम दौर कितना रोमांचक होने वाला है।
बांकीपुर विधानसभा का ऐतिहासिक और राजनीतिक महत्व
पटना जिले की 14 विधानसभा सीटों में से बांकीपुर का स्थान खास है। यहां कुल 3,79,402 मतदाता हैं, जो इस सीट के राजनीतिक महत्व को दर्शाते हैं। यह सीट लंबे समय से राजनीतिक चर्चा का केंद्र रही है, क्योंकि यहां का चुनावी समीकरण काफी जटिल और दिलचस्प रहा है। यह उपचुनाव इसलिए हो रहा है क्योंकि पूर्व विधायक नितिन नवीन ने अपने पद से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए थे। उनके इस्तीफे के बाद यह सीट खाली हो गई थी, और अब यहां उपचुनाव का आयोजन किया जा रहा है।
1995 में इस सीट का नाम पटना पश्चिम था, जिसमें किशोर सिन्हा ने जीत हासिल की थी। परिसीमन के बाद 2008 में इसका नाम बांकीपुर पड़ा। किशोर सिन्हा के निधन के बाद से नितिन नवीन ने इस सीट से लगातार जीत हासिल की है। 2006 से 2025 तक उन्होंने इस सीट पर अपनी पकड़ मजबूत रखी। पिछले चुनाव में उन्हें 98,299 वोट मिले थे, जबकि आरजेडी की रेखा गुप्ता को 46,363 वोट प्राप्त हुए। तीसरे स्थान पर जन सुराज की वंदना कुमारी रहीं। अब सभी की नजर 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग पर टिकी है, और यह देखना दिलचस्प होगा कि बीजेपी अपनी पुरानी गढ़ को कायम रख पाती है या नहीं।
आखिरी दिन की चुनावी जंग और राजनीतिक संकेत
बांकीपुर उपचुनाव का अंतिम दिन राजनीतिक दलों के बीच तीव्र मुकाबले का संकेत दे रहा है। तेजस्वी यादव और पवन सिंह के काफिले का आमना-सामना इस बात का संकेत है कि दोनों ही नेता इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। यह मुकाबला न केवल स्थानीय स्तर पर बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया है। चुनावी नतीजे इस बात का संकेत देंगे कि जनता किस ओर रुख कर रही है और किस पार्टी को अपना समर्थन दे रही है।











