महाराष्ट्र में महिला डॉक्टर की आत्महत्या का मामला राजनीतिक हंगामे में बदल गया
महाराष्ट्र के सातारा जिले के फलटण में बीते सप्ताह एक महिला डॉक्टर ने आत्महत्या कर ली, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। गुरुवार को बीड़ जिले में कई नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। इस घटना ने पूरे राज्य में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।
डॉक्टर की मौत का कारण और पुलिस कार्रवाई
23 अक्टूबर को महिला डॉक्टर का शव एक होटल के कमरे में फंदे से लटका पाया गया था। उसके हाथ पर लिखा सुसाइड नोट चर्चा का विषय बन गया, जिसमें उसने पुलिस सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदने पर बार-बार रेप करने और सॉफ्टवेयर इंजीनियर प्रशांत बनकर मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया था। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
राजनीतिक नेताओं की पीड़ित परिवार से मुलाकात
गुरुवार को बीड़ में डॉक्टर के घर पहुंचे नेताओं में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे), राकांपा (NCP) और कांग्रेस के प्रतिनिधि शामिल थे। इन नेताओं ने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे न्याय के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। शिवसेना की उपनेता सुषमा अंधारे ने कहा कि पीड़ित परिवार की बेटी बहादुर थी और उसने कोई गलती नहीं की। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता, वे परिवार के साथ खड़ी रहेंगी।
आगे की कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई, तो वे 2 नवंबर को फलटण पुलिस स्टेशन तक विरोध मार्च निकालेंगे। राकांपा प्रवक्ता रुपाली थोम्बरे ने महाराष्ट्र महिला आयोग की अध्यक्ष रुपाली चकणकर के बयान का विरोध किया और कहा कि उनका पार्टी से कोई संबंध नहीं है। कांग्रेस नेता संगीता तिवारी ने भी कहा कि उनका संगठन न्याय के लिए संघर्ष जारी रखेगा।
उच्च स्तरीय बातचीत और विवाद
उद्धव ठाकरे और अजीत पवार ने भी मृतका के परिजनों से फोन पर बात की। अजीत पवार ने कहा कि वे दोषियों को बख्शेंगे नहीं और जल्द ही परिवार से मिलेंगे। वहीं, महिला आयोग की अध्यक्ष के बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है, जिसमें विपक्षी नेताओं ने उनके विचारों का विरोध किया है।











