उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों पर परिसीमन का प्रभाव
उत्तर प्रदेश में शहरी निकायों के विस्तार के बाद अब पंचायत चुनावों का स्वरूप भी बदल रहा है। ताजा परिसीमन प्रक्रिया के कारण राज्य में जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के वार्डों की संख्या में कमी आई है। पंचायत विभाग ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसे जल्द ही राज्य निर्वाचन आयोग को सौंपा जाएगा। इस रिपोर्ट के आधार पर अगले वर्ष होने वाले पंचायत चुनावों की रूपरेखा तय की जाएगी।
कम हुए वार्ड और पंचायतों की संख्या
राज्य में अब जिला पंचायत के लिए कुल 3020 वार्ड होंगे, जबकि क्षेत्र पंचायत के लिए यह संख्या घटकर 75014 पर आ गई है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, 16 जिलों में जिला पंचायत वार्डों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक 5 वार्ड देवरिया जिले में समाप्त हुए हैं, वहीं मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में तीन-तीन वार्डों का अंत हुआ है। कुशीनगर, आजमगढ़, गोंडा, अयोध्या जैसे जिलों में भी वार्डों की संख्या घटाई गई है।
ग्राम पंचायतों का भी हुआ नुकसान
परिसीमन का असर ग्राम पंचायतों पर भी पड़ा है। वर्ष 2021 में राज्य में कुल 58,189 ग्राम पंचायतें थीं, जो अब घटकर 57,694 रह गई हैं। इसका अर्थ है कि लगभग 495 ग्राम पंचायतों का अस्तित्व समाप्त हो चुका है। साथ ही अनुमान है कि इस प्रक्रिया के साथ करीब 4,600 ग्राम पंचायत सदस्य वार्ड भी कम हो गए हैं। यह परिसीमन कार्य अगस्त में ही पूरा कर लिया गया था।
आगामी चुनाव की तैयारियां तेज
पंचायती राज विभाग अपनी अंतिम रिपोर्ट जल्द ही राज्य निर्वाचन आयोग को सौंप देगा। इस रिपोर्ट में जिला पंचायत, क्षेत्र पंचायत और ग्राम पंचायत से संबंधित सभी नए आंकड़े शामिल होंगे। इन आंकड़ों के आधार पर अगले वर्ष त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए जाएंगे। शहरी सीमा के विस्तार के बाद अब चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू हो चुका है, जिससे चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं।











