समाजवादी पार्टी का योगी सरकार पर तीखा हमला
समाजवादी पार्टी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाम बदलने की राजनीति पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पार्टी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) केवल धार्मिक और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों को ही प्रमुखता दे रही है, जबकि प्रदेश में विकास, निवेश, गरीबी, भुखमरी और दलितों पर हो रहे अत्याचार जैसे असली मुद्दे पीछे छूट गए हैं।
योगी की नाम बदलने की राजनीति से उत्तर प्रदेश पिछड़ रहा है
सपा नेता अमीक जमई ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि नाम बदलने की राजनीति से उत्तर प्रदेश में धार्मिक तनाव बढ़ा है और विकास पूरी तरह से ठप हो गया है। राज्य में कोई बड़ा निवेश नहीं हो रहा है, जिससे प्रदेश काफी पिछड़ गया है। जमई ने स्पष्ट किया कि नाम बदलने से न गरीबी कम हुई है और न ही भुखमरी घटी है। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि मुसलमानों और पिछड़ों पर अत्याचार अभी भी जारी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री की भाषणबाजी का बिहार चुनाव पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
बीजेपी की राजनीति मंदिर-मस्जिद तक सीमित: विपक्ष का आरोप
एक अन्य सपा नेता फकरुल चांद हसन ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बीजेपी की राजनीति मुख्य रूप से मंदिर-मस्जिद, हलाल और धार्मिक बहसों तक ही सीमित है। हसन ने आरोप लगाया कि योगी सरकार दलितों पर अत्याचार, किसानों की खाद की समस्या और बढ़ती बेरोजगारी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि बीजेपी हमेशा हिन्दू-मुस्लिम, हिजाब-नकाब, मदरसा और मजार जैसे विषयों को हवा देती है।
2027 में बीजेपी की राजनीति खत्म करने का दावा
फकरुल चांद हसन ने आगे कहा कि जनता अब इन धार्मिक बहसों में नहीं फंसेगी। उनका दावा है कि समाजवादी पार्टी की PDA (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) सरकार 2027 में बीजेपी की इस राजनीति को पूरी तरह समाप्त कर देगी। दोनों नेताओं ने मिलकर योगी सरकार की नीतियों और प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।
योगी सरकार का नाम परिवर्तन और विकास का दावा
गौरतलब है कि सोमवार को लखीमपुर खीरी जिले के मुस्तफाबाद गांव का नाम बदलकर कबीरधाम करने की घोषणा मुख्यमंत्री योगी ने की थी। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने सेक्युलरिज्म के नाम पर अयोध्या को फैजाबाद, प्रयागराज को इलाहाबाद और मुस्तफाबाद को कबीरधाम बनाया था। योगी ने दावा किया कि डबल इंजन की सरकार धार्मिक स्थलों की पहचान वापस लौटा रही है और साथ ही विकास कार्य भी कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले जो पैसा कब्रिस्तान की बाउंड्री में जाता था, अब धार्मिक स्थलों के विकास में खर्च हो रहा है।











