संसदीय विरोध प्रदर्शन और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष का मार्च
भारत (India) के संसद में विपक्षी दलों ने मिलकर सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया है। इस विरोध मार्च में 140 से अधिक सांसद शामिल हुए, जो संसद भवन से निकलकर निर्वाचन सदन की ओर बढ़ रहे हैं। इस दौरान कई प्रमुख नेताओं जैसे अखिलेश यादव, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ ब्रायन आदि को हिरासत में ले लिया गया है। वहीं, राहुल गांधी ने पांच घंटे से अधिक समय तक धरने पर बैठकर अपनी आवाज उठाई है।
प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और हिरासत की घटनाएं
प्रदर्शन स्थल पर भारी हंगामा देखने को मिला, जहां पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने का प्रयास किया। इस दौरान चरणजीत सिंह चन्नी, दीपेंद्र हुड्डा, पवन खेड़ा जैसे कई नेताओं को भी हिरासत में लिया गया। चुनाव आयोग के सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने किसी भी बैठक के लिए कोई अनुरोध नहीं किया है। इसके बावजूद, प्रदर्शनकारियों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है।
राहुल गांधी का विरोध और चुनाव आयोग से मुलाकात की कोशिश
राहुल गांधी ने कहा कि वे चुनाव आयोग से मिलकर यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि वोटिंग में धांधली हुई है। उन्होंने कहा कि वे सिर्फ चुनाव आयोग से मिलकर यह कहना चाहते हैं कि “आपने वोट चोरी किए हैं।” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यदि चुनाव आयोग चाहता है कि वे यहां न बैठें, तो वे दिल्ली में किसी भी जगह पर बैठने को तैयार हैं।
राहुल गांधी को आकाशवाणी भवन में घुसने से रोक दिया गया, जब वे चुनाव आयोग के कार्यालय जाने का प्रयास कर रहे थे। वे प्रियंका गांधी और के.सी. वेणुगोपाल के साथ लगभग 200 मीटर दूर धरने पर बैठ गए हैं। इस प्रदर्शन में हजारों समर्थक भी शामिल हैं।
विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग पक्षपात कर रहा है और भाजपा के पक्ष में काम कर रहा है। अखिलेश यादव ने कहा कि बंगाल और उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग ने भाजपा के पक्ष में कार्य किया है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कई सांसदों ने पुलिस बैरिकेड तोड़ने का प्रयास किया और राष्ट्रीय ध्वज लहराया।
सभी नेताओं का कहना है कि वे अपनी आवाज उठाने के लिए हर संभव कदम उठाएंगे, और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया है, साथ ही ट्रैफिक डायवर्जरी भी लागू की गई है।










