राष्ट्रपति भवन में कश्मीर और लद्दाख के व्यंजनों का अनूठा स्वाद
नई दिल्ली में आयोजित भारत और स्विट्जरलैंड के बीच उच्चस्तरीय वार्ता के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक विशेष डिनर का आयोजन किया, जिसमें पहाड़ी क्षेत्रों की पारंपरिक व्यंजन प्रमुख आकर्षण रहे। इस आयोजन में कश्मीर के प्रसिद्ध गुच्छी पुलाव और लद्दाख की पारंपरिक गुर-गुर चाय का विशेष स्थान था।
खाने के साथ मेहमानों को कश्मीरी कहवा भी परोसा गया, जो केसर, इलायची और बादाम की खुशबू से भरपूर है। यह पारंपरिक पेय कश्मीर की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। वहीं, लद्दाख की गुर-गुर चाय, जिसे बटर टी भी कहा जाता है, में नमक और मक्खन का प्रयोग होता है। यह चाय ऊंचाई वाले ठंडे इलाकों में सदियों से लोगों की दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रही है।
दोनों देशों के संबंधों को मजबूत बनाने पर चर्चा
राष्ट्रपति मुर्मु ने अपने भाषण में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों देश साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और कानून के शासन पर आधारित हैं। उन्होंने व्यापार, निवेश, विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दिया।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी स्विस राष्ट्रपति के साथ बातचीत में व्यापार, रक्षा, परमाणु ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, विज्ञान-तकनीक और युवा पीढ़ी के लिए नए अवसरों पर चर्चा की थी। इस दौरान, मेज पर कश्मीर और लद्दाख के विशिष्ट व्यंजनों ने भारत की सांस्कृतिक विविधता को भी उजागर किया।
व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्त्व
दोनों देशों के बीच इस उच्चस्तरीय बैठक में आर्थिक और सांस्कृतिक संबंधों को नई दिशा देने के प्रयास किए गए। इन पारंपरिक व्यंजनों ने न केवल मेहमानों का मन मोह लिया, बल्कि भारत की विविधता और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक बने। इस तरह के आयोजन द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में सहायक हैं और दोनों देशों के बीच मित्रता को और गहरा बनाते हैं।









