ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग में नई चुनौतियां और हाईकोर्ट का हस्तक्षेप
देशभर में यात्रियों को ऑनलाइन रेल टिकट बुकिंग के दौरान कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जो अब दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गई हैं। अदालत ने इस मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए रेल मंत्रालय (Rail Ministry) और भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (IRCTC) से जवाब मांगा है।
ख़ासतौर पर टिकट बुकिंग प्रणाली में मौजूद खामियों को लेकर उठे सवालों के बीच, हाईकोर्ट ने सरकार और रेलवे से एक सप्ताह के भीतर आवश्यक निर्देश लेकर इस संदर्भ में जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है। इस याचिका को उत्तम कुमार ने दाखिल किया है, जिनके वकील शुभम कुमार ने बताया कि इसमें IRCTC, RailOne और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के यात्री आरक्षण सिस्टम का स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सक्षम ऑडिट कराने की मांग की गई है।
याचिका में टिकट बुकिंग प्रणाली की खामियों का खुलासा
याचिका में टिकट बुकिंग सिस्टम की कई गंभीर खामियों का उल्लेख किया गया है, जिनमें वेबसाइट की धीमी गति और हैंग होने की समस्या प्रमुख है। खासतौर पर त्योहारों के मौसम में जब एडवांस और तत्काल बुकिंग की विंडो खुलती है, तो साइट बहुत धीमी हो जाती है, जिससे लॉग इन, ऑथेंटिकेशन और बुकिंग सेशन अचानक बंद हो जाते हैं।
इसके अलावा, एक और बड़ी समस्या पैसे कटने से जुड़ी है। कई बार यात्रियों के बैंक खातों से पैसे कट जाते हैं, लेकिन टिकट जेनरेट नहीं होता। इस स्थिति में, याचिका में समयबद्ध और स्पष्ट रिफंड व्यवस्था की भी मांग की गई है ताकि यात्रियों का दूसरा टिकट बुक करने का मौका न गंवाना पड़े।
सिस्टम में अनधिकृत सॉफ्टवेयर और टिकट वितरण में पारदर्शिता
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि सिस्टम में कुछ अनधिकृत सॉफ्टवेयर, ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट्स और बल्क-बुकिंग टूल्स का प्रयोग हो रहा है। इससे कुछ चुनिंदा एजेंटों या बिचौलियों को अधिक टिकट पहुंचने का मौका मिल रहा है, जबकि सामान्य यात्रियों को इन सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, तत्काल कोटा, RAC और वेटिंग लिस्ट में खाली सीटों के आवंटन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि इन सीटों का वितरण नियमों के अनुसार और पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाना चाहिए।
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पूरे आरक्षण प्रणाली का स्वतंत्र और तकनीकी ऑडिट कराएं, ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके। साथ ही, आम जनता को समान अवसर देने के लिए आवश्यक कदम उठाने का भी आदेश दिया गया है।
अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जब रेल मंत्रालय और IRCTC अपने पक्ष में जवाब देंगे।









