पूर्वी दिल्ली के मेट्रोफ्लेक्स ईस्ट मॉल में विवाद की जड़ें
पूर्वी दिल्ली के मेट्रोफ्लेक्स ईस्ट मॉल से जुड़ा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस मॉल में दुकानें खरीदने वाले कई निवेशकों का आरोप है कि उन्होंने अपनी पूरी जमा पूंजी लगाकर 2011 में दुकानें खरीदी थीं, लेकिन आज तक उन्हें न तो दुकान का कब्जा मिला है और न ही रजिस्ट्री हो सकी है। इन दुकानदारों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन की बचत इस प्रोजेक्ट में लगाई थी, फिर भी उन्हें कानूनी रूप से अपने अधिकारों का लाभ नहीं मिल रहा है।
दुकानों की संख्या और निर्माण में कथित अनियमितता का आरोप
दुकानदारों का दावा है कि उनके अनुसार, मॉल का निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि करीब 110 दुकानों का नक्शा पास किया गया था, लेकिन निर्माण स्थल पर लगभग 245 दुकानें बना दी गईं। इस कथित बदलाव के कारण मॉल को आवश्यक कंप्लीशन सर्टिफिकेट और फायर एनओसी भी नहीं मिल सकी। दुकानदारों का यह भी आरोप है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के लेआउट में भी बदलाव किया गया है, जिससे निर्माण प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
मामला अदालत पहुंचने के बाद की स्थिति
इस विवाद के चलते दुकानदारों ने अदालत का रुख किया है। उनका कहना है कि निचली अदालत और उच्च न्यायालय दोनों ने उनके पक्ष में आदेश दिए हैं, और DDA को नियमों के तहत कार्रवाई करने का निर्देश भी मिला है। बावजूद इसके, उनकी समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है और वे अपने पजेशन और रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे हैं। कुछ दुकानदारों का यह भी आरोप है कि उनके भुगतान की गई दुकानों का उपयोग दूसरे लोग कर रहे हैं, जिनके खिलाफ उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है।
दुकानदारों का यह भी दावा है कि इस प्रोजेक्ट में उन्होंने करोड़ों रुपये का निवेश किया है। उनका कहना है कि 2010 के आसपास इसकी कीमत लगभग 28 करोड़ रुपये थी, जो अब बढ़कर 500 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। वे यह भी आरोप लगा रहे हैं कि करीब 110 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं, हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में DDA सदस्य और बीजेपी नेता राजीव बब्बर ने कहा है कि निर्माण कंपनी ने नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने बताया कि 2010 में कंपनी ने योजना दी थी, लेकिन 2020 में निरीक्षण के दौरान पता चला कि निर्माण स्वीकृत नक्शे के अनुसार नहीं हुआ। इसके बाद DDA ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और मामला रेरा कोर्ट में भी पहुंचा।
बब्बर ने यह भी कहा कि इस मामले में अदालत का फैसला आने के बाद ही कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान स्थिति में दुकानदार परेशान हैं और निर्माण में नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डर की भूमिका मुख्य है। उनका मानना है कि इस विवाद का समाधान जल्द ही न्यायालय के फैसले के बाद ही संभव है।









