दिल्ली में पीजी इमारतों की सुरक्षा जांच तेज, खतरे की आशंका
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने पीजी (प्लेसमेंट ग्राउंड) और अन्य आवासीय इमारतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जांच अभियान को और अधिक सख्त कर दिया है। अब तक कुल 1355 इमारतों की जांच पूरी हो चुकी है, जिनमें से तीन को अत्यंत खतरनाक श्रेणी में रखा गया है। इसके साथ ही, नौ संपत्तियों में व्यापक मरम्मत की आवश्यकता पाई गई है, जिससे सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
सर्वे में चिन्हित हुई खतरनाक और संवेदनशील इमारतें
मौजूदा सर्वेक्षण में नौ ऐसी इमारतें मिली हैं, जिनमें मरम्मत का कार्य बड़े स्तर पर आवश्यक है। इन इमारतों में कुल 140 लोग रह रहे हैं। केशवपुरम में भी पांच इमारतें चिन्हित हुई हैं, जहां 36 लोग निवास कर रहे हैं। नजफगढ़ में दो इमारतों में 38 और साउथ जोन-II की दो इमारतों में 66 लोग रहते हैं। इसके अतिरिक्त, 39 इमारतों में मामूली मरम्मत की जरूरत पाई गई है, जिनमें कुल 664 लोग निवास कर रहे हैं। सर्वे के दौरान कुछ इमारतों को संवेदनशील माना गया है, जिन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चार दिनों में कार्रवाई का सिलसिला और नोटिस जारी
7 से 10 सितंबर के बीच दिल्ली नगर निगम (MCD) ने लगातार कार्रवाई की है। इस दौरान सात सितंबर को सात, आठ सितंबर को 17, नौ सितंबर को 46 और दस सितंबर को 41 संपत्तियों को तोड़ा गया। इस तरह चार दिनों में कुल 111 संपत्तियों पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। इन में से कई पर बुलडोजर चलाए गए और कुछ को सील भी किया गया है। दस सितंबर को कई इमारतों को सील करने के साथ ही तोड़फोड़ का भी अभियान चलाया गया। अब तक 88 संपत्तियों को सील किया जा चुका है।
मकान मालिकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए हैं। गैरकानूनी निर्माण के लिए 91 संपत्तियों को नोटिस भेजे गए हैं, जबकि 69 नोटिस सीलिंग से संबंधित हैं। इसके अलावा, 34 इमारतों को तोड़ने का आदेश भी जारी किया गया है। सर्वेक्षण में सिविल लाइंस में ग्राउंड फ्लोर के अलावा चार मंजिला से अधिक ऊंची 21 इमारतें मिली हैं, जिनमें 420 लोग रहते हैं। शाहदरा साउथ जोन-II में ऐसी 57 इमारतें मिली हैं, जिनमें 2036 लोग निवास कर रहे हैं। करोल बाग और शाहदरा साउथ जोन-I में भी कई इमारतें चिन्हित हुई हैं।
मौजूदा सर्वे अभी भी कई इलाकों में जारी है। कुछ क्षेत्रों के आंकड़े प्रारंभिक हैं, इसलिए पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। दिल्ली सरकार की यह कार्रवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने और भविष्य में किसी भी तरह के हादसे से बचाव के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










