सत्य निकेतन में अवैध बहुमंजिला निर्माण और पीजी संकट
दिल्ली के दक्षिणी हिस्से में स्थित सत्य निकेतन क्षेत्र में अवैध बहुमंजिला इमारतों और पीजी (प्लेसमेंट जॉब्स) की बढ़ती संख्या ने चिंता बढ़ा दी है। गूगल सैटेलाइट डेटा के अनुसार, 2016 से 2023 के बीच इस इलाके में इमारतों की ऊंचाई में लगभग 38 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। वहीं, दिल्ली में छात्रावास और पीजी की भारी कमी के कारण छात्र इन खतरनाक और अवैध निर्माणों में रहने को मजबूर हैं।
सैटेलाइट डेटा से खुलासा: अवैध निर्माण का बढ़ता जाल
सत्य निकेतन, जो दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास है, छात्रों का एक प्रमुख आवासीय केंद्र है। इस क्षेत्र का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि 2016 में यहां लगभग 179 इमारतें थीं, जो 2023 तक बढ़कर 204 हो गई हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इस क्षेत्र में आवास की कमी के कारण अवैध निर्माण तेजी से हो रहे हैं। जमीन पर नए निर्माण के लिए जगह न के बराबर बची थी, इसलिए पुराने भवनों के ऊपर अवैध रूप से अतिरिक्त मंजिलें बनाई जा रही हैं।
इमारतों की ऊंचाई में बढ़ोतरी और पीजी बाजार का विस्तार
सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग कर किए गए अध्ययन में पाया गया कि 2016 और 2023 के बीच सत्य निकेतन की लगभग 38 प्रतिशत इमारतें ऊंचाई में बढ़ी हैं। इनमें से करीब 12 प्रतिशत हिस्सों में इमारतें तीन मीटर से अधिक ऊंची हो गई हैं, जो सामान्यतः एक अतिरिक्त मंजिल या फ्लोर जोड़ने के बराबर है। यह स्पष्ट संकेत है कि बिना सुरक्षा जांच या संरचनात्मक मजबूती के अवैध बहुमंजिला निर्माण का खेल चल रहा है।
साथ ही, दिल्ली के छह प्रमुख छात्र इलाकों का सर्वेक्षण करने पर पता चला कि पूरे साउथ कैंपस बेल्ट में लगभग 1275 पीजी और हॉस्टल की लिस्टिंग मिली है। इनमें से सबसे अधिक संख्या नॉर्थ कैंपस और मुखर्जी नगर में 484, लक्ष्मी नगर और शकरपुर में 242, और ओल्ड राजेंद्र नगर, करोल बाग व पटेल नगर में 200 से अधिक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये आंकड़े केवल ऑनलाइन उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित हैं। असल में, इन इलाकों में बिना रजिस्ट्रेशन और विज्ञापन के हजारों अनधिकृत पीजी चल रहे हैं। हॉस्टलों की कमी के कारण छात्र इन जर्जर और अवैध बहुमंजिला इमारतों में रहने को मजबूर हैं, जबकि मकान मालिक और प्रशासनिक तंत्र इन खतरनाक निर्माणों को अनदेखा कर बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं।











