सहारनपुर में मस्जिद ध्वस्तीकरण का मामला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया
सहारनपुर के कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित मस्जिद के विध्वंस की घटना अब केवल स्थानीय स्तर पर ही सीमित नहीं रह गई है। इस विवाद में अब जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) का भी हस्तक्षेप हो गया है। दिल्ली से आए इस संगठन के प्रतिनिधिमंडल ने सहारनपुर पहुंचकर इस मसले पर गहरी चर्चा की। उन्होंने मस्जिद के पक्ष में खड़े समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व सांसद हाजी फजलुर रहमान से उनके आवास पर मुलाकात की।
मस्जिद ध्वस्तीकरण से जुड़ी जटिलताओं पर हुई चर्चा
मुलाकात के दौरान कई सवाल उठे-मस्जिद कैसे गिराई गई? कानूनी लड़ाई अब कहां तक पहुंची है? आगे क्या कदम उठाए जाएंगे? सबसे अहम सवाल यह भी था कि क्या यह मामला हाईकोर्ट तक जाएगा। जमीयत उलेमा-ए-हिंद का प्रतिनिधिमंडल सीधे हाजी फजलुर रहमान से मिला और पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से चर्चा की। इस बैठक में मस्जिद विध्वंस से जुड़े हर पहलू पर विचार-विमर्श हुआ।
कानूनी प्रक्रिया और स्थानीय समर्थन का विश्लेषण
इस मुलाकात में कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी बात हुई। हाजी फजलुर रहमान के अनुसार, संबंधित ट्रिब्यूनल में जज की अनुपस्थिति के कारण राहत मिलने की उम्मीद कम थी। इसलिए, मस्जिद पक्ष ने जिला अदालत का रुख किया, लेकिन इस फैसले से भी उन्हें निराशा हाथ लगी। प्रतिनिधिमंडल में शामिल राष्ट्रीय नेता और जिम्मेदार लोग हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और पंजाब से भी सहारनपुर पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य है-मामले के हर पहलू को समझना और फिर रणनीति बनाना।











