दिल्ली में एमसीडी की कार्रवाई और मानवाधिकार आयोग का कदम
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (एमसीडी) ने तुरंत ही कार्रवाई शुरू कर दी है। लक्ष्मी नगर और विश्वास नगर में चल रहे अवैध पीजी (PG) संस्थानों के खिलाफ एमसीडी की टीम ने निरीक्षण किया है। लक्ष्मी नगर में विशेष रूप से अवैध रूप से संचालित पीजी की संरचनात्मक स्थिति का सर्वेक्षण किया जा रहा है।
इस बीच राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के छात्रों, विशेषकर बाहर से आने वाले विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हॉस्टल सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लिया है। आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के अध्यक्ष को हॉस्टल की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया है।
शिकायत और आयोग की कार्रवाई का इतिहास
यह मामला वर्ष 2025 में नेटवर्क फॉर एक्सेस टू जस्टिस एंड मल्टीडिसिप्लिनरी आउटरीच फाउंडेशन (NAJMF) की शिकायत के बाद सामने आया था। शिकायत में बताया गया था कि दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग 72,000 अंडरग्रेजुएट छात्र पढ़ रहे हैं, लेकिन हॉस्टल की उपलब्धता बहुत ही कम है। बाहर से आने वाले छात्रों को अक्सर महंगे पीजी या निजी किराए के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे उनके आर्थिक बोझ में वृद्धि होती है और उनकी पढ़ाई पर भी असर पड़ता है।
इस मुद्दे को मानवाधिकारों से जुड़ा मानते हुए आयोग ने 30 सितंबर 2025 को प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में सुनवाई की। मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 12 के तहत संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) मांगी गई। आयोग ने समय पर रिपोर्ट न मिलने पर रिमाइंडर जारी किया और अतिरिक्त समय भी प्रदान किया।
रिपोर्ट और आगे की दिशा
दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि उसके अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम 65 कॉलेजों के माध्यम से संचालित हैं। विश्वविद्यालय ने बाहर से आने वाले छात्रों की रहने की समस्या का जिक्र किया और हॉस्टल तथा इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। हालांकि, आयोग ने पाया कि विश्वविद्यालय की रिपोर्ट मुख्य शिकायत का पर्याप्त समाधान नहीं प्रस्तुत करती। इसमें हॉस्टल की वर्तमान क्षमता, आवश्यक अतिरिक्त क्षमता, वित्तीय जिम्मेदारियों और समयसीमा का स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
अब आयोग ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव और UGC के अध्यक्ष को स्पष्ट, विस्तृत और क्रियान्वयन योग्य रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसमें मौजूदा हॉस्टल का मूल्यांकन, नए हॉस्टल की जरूरत, विस्तार, रिनोवेशन, और क्षमता बढ़ाने के उपाय शामिल होंगे। साथ ही, कॉलेजवार आवश्यकताओं का विश्लेषण और वित्तीय जिम्मेदारियों का निर्धारण भी जरूरी है।
रिपोर्ट जमा करने की अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2026 तय की गई है। आयोग का उद्देश्य है कि उच्च शिक्षा तक पहुंच सिर्फ दाखिले तक सीमित न रहे, बल्कि छात्रों को पर्याप्त और किफायती रहने की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएं।









