भागलपुर में गंगा बाढ़ का कहर: घर और आशियाना उजड़ गया
बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी की प्रलयंकारी बाढ़ ने एक नवविवाहित युवक का जीवन ही बदल कर रख दिया है। सबौर प्रखंड की इंग्लिश बस्ती में रहने वाले प्रियम कुमार की शादी को महज दो महीने ही हुए थे, जब अचानक आई बाढ़ ने उनके सपनों का घर और सारा सामान अपने साथ बहा लिया। इस विनाशकारी प्राकृतिक आपदा ने परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है।
रात के समय हुई बाढ़ की तबाही और परिवार का संघर्ष
यह घटना रात लगभग दो से दो साढ़े दो बजे के बीच की है, जब परिवार के सदस्य सो रहे थे। तभी प्रियम की मां सांझी देवी को घर में घरघराहट जैसी आवाज सुनाई दी। शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई चोर घर में घुस आया है, लेकिन जब उन्होंने बाहर जाकर देखा, तो उनके होश उड़ गए। घर का एक हिस्सा तेज बहाव में बह चुका था और पानी लगातार घर के अंदर घुस रहा था।
परिवार ने अपने मवेशियों को बाहर निकालने में सफलता पाई, लेकिन घर का अधिकांश सामान जैसे फ्रिज, गोदरेज, वाशिंग मशीन, साइकिल, बाइक, कपड़े और घरेलू सामान सब नदी में बह गए। प्रियम बताते हैं कि उनके पास घर में रखे सभी कीमती सामान जैसे कि घरेलू उपकरण, कपड़े और अन्य जरूरी वस्तुएं अब केवल यादें बनकर रह गई हैं।
नई जिंदगी की उम्मीदें टूटी, मदद की आस जगी
प्रियम की शादी करीब दो महीने पहले हुई थी, और उनकी पत्नी रक्षाबंधन के त्योहार पर अपने मायके गई थीं। उस समय घर में मौजूद नहीं थीं, वरना स्थिति और भी भयावह हो सकती थी। अब वह अपनी नई जीवन साथी के साथ फिर से जीवन शुरू करने का सपना देख रहे हैं।
बाढ़ के कारण परिवार के पास अब पहनने के कपड़े भी नहीं हैं। प्रियम ने बताया कि उनके शरीर पर जो कपड़े हैं, वे भी किसी और ने दिए हैं। रात में गमछा पकड़कर सोना पड़ रहा है। घर का लगभग पूरा सामान नदी में बह चुका है, केवल एक साइकिल और एक गाय ही उनके पास बची है। फिलहाल, परिवार को पंचायत भवन में रहने की व्यवस्था दी गई है, लेकिन अभी कोई स्थायी सुविधा नहीं मिल पाई है।
परिवार की सबसे बड़ी चिंता अब रहने और रोजमर्रा की जिंदगी चलाने की है। मदद के नाम पर कभी-कभी एक किलो चूड़ा या खाने का पैकेट ही मिल पाता है, जिससे परिवार का गुजारा हो रहा है। इस प्राकृतिक आपदा में परिवार के पास केवल एक गाय और एक साइकिल ही बची है, जिनसे वे अपने जीवन की उम्मीदें जोड़ रहे हैं।











