शिवपुरी में बच्चों की लगातार मौतें चिंता का विषय
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में एक परिवार के चार बच्चों की दुखद मौत ने पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। इन बच्चों की एक के बाद एक हुई मौतों ने स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य विभाग दोनों की चिंता बढ़ा दी है। इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत ही संबंधित परिवार के चार और बच्चों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें ग्वालियर (Gwalior) के मेडिकल कॉलेज में स्थानांतरित कर दिया है। साथ ही, डॉक्टरों की एक विशेषज्ञ टीम भी इन बच्चों के साथ गई है।
इलाके में स्वास्थ्य जांच और ब्लड सैंपल संग्रह अभियान
इस बीच, स्वास्थ्य विभाग ने इलाके के 150 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल लेकर उनकी जांच शुरू कर दी है। इन सैंपलों में मलेरिया और CBC (कंप्लीट ब्लड काउंट) जैसी जांचें की जा रही हैं, ताकि किसी भी संभावित बीमारी या संक्रमण का पता लगाया जा सके। शिवपुरी जिला मुख्यालय में हुई इस घटना के बाद विभाग ने आसपास के क्षेत्र में भी जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
बच्चों की स्थिति और जांच का महत्त्व
बुधवार की शाम को स्थिति और भी गंभीर हो गई जब चार अन्य बच्चों की तबीयत में गिरावट दर्ज की गई। इन बच्चों को तुरंत ही शिवपुरी जिला अस्पताल से ग्वालियर के मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी स्पष्ट कर रहे हैं कि ग्वालियर भेजे गए बच्चों की वर्तमान स्थिति स्थिर है। उनका कहना है कि बच्चों को बेहतर इलाज और किसी भी अनहोनी से बचाव के लिए ही उन्हें ग्वालियर भेजा गया है।
बच्चों को अकेले नहीं भेजा गया है, बल्कि उनके साथ डॉक्टरों की टीम भी मौजूद है, जिसमें जिला टीकाकरण अधिकारी डॉक्टर रोहित भदकारिया और नर्सिंग ऑफिसर सुनील लोधी शामिल हैं। ये विशेषज्ञ बच्चे के इलाज के दौरान उनके साथ रहेंगे।
फिलहाल, सबसे जरूरी है जांच रिपोर्ट का इंतजार, क्योंकि अभी तक मलेरिया और CBC जैसी जांचें पूरी हो चुकी हैं, लेकिन असली वजह का पता नहीं चल पाया है। प्रशासन का कहना है कि बच्चों को बेहतर इलाज देने के उद्देश्य से ही उन्हें ग्वालियर भेजा गया है। शिवपुरी के एडमिनिस्ट्रेटिव अधिकारी दिनेश चंद्र शुक्ला ने भी यही कहा है कि बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए ही यह कदम उठाया गया है।
अब सभी की निगाहें इन चार बच्चों की सेहत पर और साथ ही साथ 150 से अधिक लोगों के ब्लड सैंपल की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। जब तक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक यह सवाल बना रहेगा कि आखिर एक ही परिवार के बच्चों की लगातार मौत का कारण क्या था।









