हरियाणा के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी की आत्महत्या का मामला
चंडीगढ़ में 7 अक्टूबर को हरियाणा कैडर के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार ने अपने घर के बेसमेंट में खुद को गोली मारकर अपनी जान दे दी। इस दुखद घटना से एक दिन पहले ही उन्होंने अपनी सारी संपत्ति पत्नी और वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अमनीत पी. कुमार के नाम कर दी थी। साथ ही, उन्होंने नौ पन्नों का एक सुसाइड नोट भी लिखा, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी को भेजा था।
सुसाइड नोट में लगाए गंभीर आरोप
पूरन कुमार के सुसाइड नोट में उन्होंने 15 वरिष्ठ और पूर्व आईएएस-आईपीएस अधिकारियों पर जातिगत भेदभाव, मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक अपमान का आरोप लगाया है। इनमें हरियाणा के वर्तमान चीफ सेक्रेटरी अनुराग रस्तोगी, डीजीपी शत्रुजीत कपूर, पूर्व चीफ सेक्रेटरी टी.वी.एस.एन. प्रसाद, पूर्व गृह विभाग के एसीएस राजीव अरोड़ा, पूर्व डीजीपी मनोज यादव और पी.के. अग्रवाल जैसे नाम शामिल हैं। उन्होंने लिखा कि उन्हें बार-बार अपमानित पोस्टिंग दी गई, शिकायतें अनसुनी की गईं और झूठे मामलों में फंसाया गया।
आरोपों का विस्तार और मानसिक उत्पीड़न
पूरन कुमार ने अपने नोट में कहा कि उन्हें मंदिर जाने पर भी निशाना बनाया गया और पिता की मृत्यु से पहले छुट्टी नहीं दी गई, जिसे उन्होंने ‘अपूर्णीय क्षति’ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि शिकायतें दबाई गईं या उनके खिलाफ ही इस्तेमाल की गईं। साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि उनका बकाया वेतन, एरियर और वाहन संबंधी सवालों को नजरअंदाज किया गया। खासतौर पर उन्होंने डीजीपी शत्रुजीत कपूर पर आरोप लगाया कि वे एसपी नरेंद्र बिजरानिया को ‘ढाल’ बनाकर उनके खिलाफ झूठे केस करवा रहे थे।
पत्नी का विरोध और पोस्टमार्टम का इनकार
पूरन कुमार की पत्नी अमनीत पी. कुमार ने विदेश से लौटने के बाद सेक्टर 11 थाने में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी और रोहतक एसपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए, उन्हें गिरफ्तार किया जाए और एससी/एसटी एक्ट तथा धारा 108 के तहत केस चलाया जाए। साथ ही, उन्होंने पति के शव का पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया है, यह कहते हुए कि जब तक आरोपियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता, वे इसकी अनुमति नहीं देंगी।











