दिल्ली में हिंसक प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला
दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर हुई हिंसा में कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर पत्थर और डंडों से हमला किया, जिससे कई अधिकारी चोटिल हुए। घायल पुलिसकर्मियों ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि भीड़ ने उनके ऊपर जानलेवा हमला किया।
भीड़ का हमला और पुलिस की सुरक्षा में खलल
नंद किशोर सिंह ने बताया, “मेरा सामान भी छीनने की कोशिश की गई। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि जो भी सामने आएगा, उस पर हमला किया जाएगा। भीड़ में लगभग 150 से 200 लोग शामिल थे, जो एक साजिश के तहत काम कर रहे थे। ऐसा लग रहा था कि वे मुझे जान से मारने के इरादे से आए थे। मुझे गंभीर चोटें आई हैं, यदि समय पर बचाव न होता तो मेरी जान जा सकती थी। पुलिस अब वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान कर रही है।”
पुलिसकर्मियों पर पत्थरबाजी और हिंसक भीड़ का आतंक
एसीपी विवेक भगत ने भी उस रात का भयावह दृश्य साझा किया। वह सेक्टर-1 जोन-1 में तैनात थे, जिसमें जंतर-मंतर का क्षेत्र भी शामिल है। शाम की शिफ्ट के दौरान, वह रीगल बिल्डिंग (कनॉट प्लेस) से संसद मार्ग और टॉल्स्टॉय मार्ग की ओर रिपोर्ट कर रहे थे। उनके साथ अन्य पुलिसकर्मी भी पैदल चल रहे थे। उन्होंने बताया कि जैसे ही वे आगे बढ़े, उन्होंने देखा कि उनके स्टाफ पर पानी की बोतलें फेंकी जा रही थीं और नारेबाजी हो रही थी। अचानक भीड़ ने एक जवान को घेर लिया, जिसके सिर से खून बह रहा था और पूरा चेहरा खून से सन चुका था।
उन्होंने आगे कहा, “अपने साथी की जान बचाने के लिए मैंने तुरंत बीच-बचाव किया। हम उसे खींचकर कुछ कदम आगे ले आए, लेकिन भीड़ बहुत बड़ी और हिंसक थी। उन्होंने हमें भी घेर लिया। पुलिस अधिकारियों को निशाना बनाकर उनके खिलाफ हिंसक रवैया अपनाया जा रहा था।”
एसीपी रोहित सतवान ने भी अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि वह रात करीब 8.15 बजे कनॉट प्लेस के रीगल सिनेमा के पास ड्यूटी कर रहे थे, जब उन्हें पता चला कि भीड़ हंगामा कर रही है। जैसे ही वे पार्क होटल के पास पहुंचे, तो प्रदर्शनकारियों ने उन पर बोतलें और पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। उनके स्टाफ के एक सदस्य को भीड़ ने घेर लिया और पीटना शुरू कर दिया।
उन्होंने कहा, “मुझे पीछे से डंडों से मारा गया और पत्थर भी फेंके गए। भीड़ ने हमारे ऊपर ईंटें और बड़े पत्थर फेंके, जिनमें से कई मुझे लगे। विवेक सर को भी भीड़ ने घेर लिया था, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं। उनका चेहरा खून से लथपथ था और उन्हें लात मारकर गिरा दिया गया।”











