बिहार में सट्टेबाजी और जुए पर कड़ी कार्रवाई की तैयारी
बिहार सरकार अब शराबबंदी के साथ-साथ सट्टेबाजी और जुए के अवैध खेलों को रोकने के लिए भी सख्त कदम उठाने जा रही है। बिहार विधानसभा में आगामी मानसून सत्र में ‘बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक’ पेश किया जाएगा, जिसका उद्देश्य ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्रकार की जुआ और सट्टेबाजी पर प्रतिबंध लगाना है। इस विधेयक में अपराधियों के लिए कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, ताकि अवैध जुआ गतिविधियों को नियंत्रित किया जा सके।
सजा और दंड की कठोर व्यवस्था का प्रावधान
इस विधेयक के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति पहली बार जुआ या सट्टेबाजी में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे तीन साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, यदि कोई व्यक्ति बार-बार इस तरह के अपराध में लिप्त पाया जाता है, तो उसकी सजा और भी कठोर कर दी जाएगी। दोबारा दोषी पाए जाने पर उसे सात साल तक की जेल और दस लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। यह कानून जुए के लेन-देन में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल माध्यमों पर भी प्रभावी होगा, जिसमें बैंक खातों और डिजिटल वॉलेट का उपयोग करने वालों को भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विज्ञापन पर सख्त कार्रवाई
विधेयक में ऑनलाइन जुए और सट्टेबाजी के प्रचार एवं विज्ञापन पर भी रोक लगाने का प्रावधान है। अधिकारियों को इस तरह के प्लेटफॉर्म के प्रचार-प्रसार के खिलाफ सख्त कदम उठाने का अधिकार दिया गया है। साथ ही, इन गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ अदालत में मुकदमा चलाने का भी प्रावधान है। इस कदम का उद्देश्य जुआ और सट्टेबाजी के अवैध कारोबार को पूरी तरह से समाप्त करना है, ताकि समाज में इसकी बढ़ती प्रवृत्ति पर रोक लगाई जा सके।











