जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान बरखा त्रेहन का विवादित कदम
जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन के बीच सोशल कार्यकर्ता बरखा त्रेहन ने सुर्खियां बटोरी हैं। शनिवार (18 जुलाई) को जब अभिजीत दीपके, जो सीजेपी (सेंट्रल जेंडर पॉलिसी कमीशन) के संस्थापक हैं, अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे, उसी समय उन्होंने स्याही फेंक दी। यह घटना उस वक्त हुई जब दीपके समर्थकों को संबोधित कर रहे थे। इस घटना के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और भीड़ ने महिला को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।
बरखा त्रेहन का सोशल मीडिया पर बयान और आरोप
घटना के तुरंत बाद, बरखा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि वह वही महिला हैं जिन्होंने अभिजीत दीपके पर स्याही फेंकी। उनका आरोप है कि दीपके ने उनके प्रभु श्रीराम का अपमान किया था, जब वह अपनी पार्टी के मंच पर हंसी उड़ाने का प्रयास कर रहे थे। बरखा ने यह भी कहा कि वह एक कट्टर हिंदू हैं और इस विरोध में गर्व महसूस कर रही हैं। उन्होंने अपने साथ हुई मारपीट का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि समर्थकों ने उनके बाल खींचे और उन्हें पीटा।
सामाजिक कार्यकर्ता का विवादित रुख और राजनीतिक जुड़ाव
बरखा त्रेहन एक जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो पुरुषों के अधिकारों के लिए अभियान चलाती हैं। वह पुरुष आयोग की अध्यक्ष भी हैं और जेंडर-न्यूट्रल कानूनों का समर्थन करती हैं। उन्होंने दहेज, घरेलू हिंसा और विवाह से जुड़े मामलों में कानूनों के दुरुपयोग को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की है। इसके साथ ही, उन्होंने भारत में वैधानिक पुरुष आयोग की स्थापना की भी वकालत की है।
हालांकि, बरखा का नाम कई विवादों से भी जुड़ा रहा है। उन्नाव रेप मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के समर्थन में प्रदर्शन करने पर उन्हें आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था। पुलिस के अनुसार, वह आखिरी बार 25 दिसंबर 2025 को जंतर-मंतर पर देखी गई थीं, जहां उन्होंने सेंगर के समर्थन में प्रदर्शन किया था।









