सुप्रीम कोर्ट में आसाराम की जमानत और सजा पर सुनवाई
नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी और स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की सजा पर रोक लगाने और जमानत की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। इस मामले की अध्यक्षता जस्टिस एम.एम. सुंदरेश की बेंच ने की। अदालत ने सॉलिसिटर जनरल से आग्रह किया कि वह आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति का विस्तृत विवरण प्रदान करें, ताकि यह तय किया जा सके कि उन्हें जमानत दी जाए या नहीं। आगामी सुनवाई अब 21 जुलाई को निर्धारित की गई है।
आसाराम की स्वास्थ्य स्थिति पर कोर्ट का ध्यान और निर्देश
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि आसाराम के पेट में समस्या के कारण उनके शरीर में खून की कमी हो रही है। उन्होंने कहा कि यह समस्या अस्थायी है और इसके लिए जीवनशैली में बदलाव आवश्यक हो सकता है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आप कहते हैं कि यह जरूरी नहीं है, तो हम जमानत नहीं देंगे। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि उनकी स्थिति गंभीर है, तो हम नहीं चाहते कि इस मामले में कोई दोष या गलतफहमी बने। बेंच ने मेहता से उनकी सेहत के बारे में सही जानकारी प्राप्त करने को कहा और कहा, ‘हम नहीं चाहते कि हमें या आपको दोषी ठहराया जाए।’ कोर्ट ने यह भी कहा कि सही निर्देश लेना जरूरी है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
आसाराम की जमानत की मांग और स्वास्थ्य संबंधी दलीलें
आसाराम के वकील ने जमानत की अपील करते हुए कहा कि उनकी स्थिति अत्यंत गंभीर है और वह हाई-रिस्क मरीज हैं। वकील ने यह भी बताया कि तीन महीने पहले जब वह अयोध्या और काशी विश्वनाथ गए थे, तब वह पैदल ही यात्रा कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अब उनकी सेहत में सुधार हो रहा है और वह ठीक-ठाक स्थिति में हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की है।









