स्लीमनाबाद जल सुरंग का अंतिम चरण में प्रवेश
मध्य प्रदेश की प्रमुख सिंचाई परियोजनाओं में से एक स्लीमनाबाद जल सुरंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। यह लगभग 11.952 किलोमीटर लंबी सुरंग, जो कटनी जिले में बन रही है, देश की सबसे लंबी और तकनीकी रूप से सबसे जटिल जल सुरंग मानी जा रही है। मुख्यमंत्री मोहन यादव इस परियोजना का निरीक्षण शुक्रवार को करेंगे।
यह सुरंग केवल कंक्रीट का ढांचा नहीं है, बल्कि यह विंध्य पर्वतमाला को पार कर नर्मदा के पानी को सीधे सोन नदी के किनारे तक पहुंचाने वाली एक अनूठी भारतीय इंजीनियरिंग का उदाहरण है। जैसे ही यह परियोजना पूरी होगी, विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के 1450 गांवों के लाखों किसानों की जिंदगी में खुशहाली और समृद्धि का नया सवेरा आएगा।
प्राचीन विरह को मिटाने का आधुनिक प्रयास
धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अमरकंटक से निकलने वाली मां नर्मदा और सोन नदी विपरीत दिशाओं में बहकर सदियों से अलग हो गई थीं। सरकार ने इस प्राचीन विरह को दूर करने और विंध्य की प्यासी धरती को सींचने के लिए इस परियोजना को अपना ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ बनाया है। व्यक्तिगत हस्तक्षेप, त्वरित निर्णय और वित्तीय स्वीकृतियों के कारण 17 वर्षों से अटकी इस महा-परियोजना को तेज़ी मिली है। अब बस टनल में अंतिम एक मीटर का ‘ब्रेक-थ्रू’ बाकी है।
महा-परियोजना की चुनौतियां और सफलता की कहानी
विंध्य की 40 मीटर ऊंची कठोर चट्टानों और जमीन से लगभग 30 मीटर नीचे चल रहे इस विशाल अभियान में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। मार्बल, लाइमस्टोन और डोलोमाइट जैसी मजबूत चट्टानों के साथ-साथ टनल के अंदर प्रति मिनट 25 हजार लीटर पानी का रिसाव काम को रोकने का कारण बना। एक समय ऐसा भी आया जब अमेरिकी मशीनें टूटकर पस्त हो गई थीं।
इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अत्याधुनिक जर्मन हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष टेम ग्राउटिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। घनी आबादी, राष्ट्रीय राजमार्ग और रेलवे ट्रैक के नीचे से गुजरने के बावजूद, इस सुरंग को सुरक्षित तरीके से पूरा किया गया है।
यह महा-परियोजना पांच जिलों को नई जिंदगी देने जा रही है। सुरंग का व्यास 10.14 मीटर है, और इसके पूरी तरह चालू होने पर बरगी दायीं तट मुख्य नहर के माध्यम से पानी सीधे खेतों तक पहुंचेगा। इससे कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जिलों की सूखी भूमि हरी-भरी हो जाएगी।
सरकार ने इस परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए रोडमैप भी तैयार किया है। वर्तमान में 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। मार्च 2026 तक 44,160 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की व्यवस्था हो जाएगी, और दिसंबर 2027 तक यह संख्या बढ़कर 1,54,693 हेक्टेयर हो जाएगी।











