मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा उपचुनाव का राजनीतिक संग्राम तेज
मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट पर आगामी उपचुनाव अब देश की राजनीति का मुख्य केंद्र बन चुका है। इस सीट के लिए हुए टिकट वितरण और प्रत्याशियों के चयन ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद हुए विवाद के बीच दो महत्वपूर्ण घटनाएं सामने आई हैं। पहली, कांग्रेस ने इस सीट से अपने आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में घनश्याम सिंह की घोषणा कर दी है। दूसरी, महाराष्ट्र की प्रमुख पार्टी शिवसेना (UBT) ने नाराज नरोत्तम मिश्रा को दतिया से चुनाव लड़ने का खुला न्योता दे दिया है।
घनश्याम सिंह का राजनीतिक इतिहास और चुनावी अनुभव
दतिया के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष 72 वर्षीय घनश्याम सिंह का संबंध दतिया राजघराने से है। उन्होंने तीन बार विधायक के रूप में अपनी सेवाएं दी हैं। कांग्रेस ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है। घनश्याम सिंह का राजनीतिक सफर 1993 में शुरू हुआ, जब उन्होंने भाजपा के शंभू दयाल तिवारी को हराकर पहली बार विधानसभा सीट जीती। इसके बाद 1998 में टिकट न मिलने के बावजूद, 2003 में उन्होंने अवधेश नायक को हराकर वापसी की। 2008 में नरोत्तम मिश्रा से हारने के बाद, सिंह ने 2013 में सेवढ़ा से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। 2018 में उन्होंने फिर से यह सीट जीती, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदीप अग्रवाल से हार का सामना करना पड़ा। सिंह का कहना है कि वे इस उपचुनाव में जीत हासिल कर विकास के साथ-साथ जातिवाद और बदले की राजनीति को खत्म करने का प्रयास करेंगे।
शिवसेना (UBT) का नरोत्तम मिश्रा को दतिया से चुनाव लड़ने का प्रस्ताव
महाराष्ट्र की प्रमुख पार्टी शिवसेना (UBT) ने नरोत्तम मिश्रा को दतिया से चुनाव लड़ने का खुला निमंत्रण दिया है। शिवसेना (UBT) के सांसद सुनील शर्मा ने कहा कि यदि मिश्रा इस प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं, तो पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे तथा आदित्य ठाकरे सहित अन्य नेता मध्य प्रदेश में उनके प्रचार के लिए उपस्थित होंगे। शर्मा ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने नेतृत्व से चर्चा के बाद यह प्रस्ताव दिया है। महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) के 20 विधायक और तीन सांसद हैं, और हाल ही में छह सांसद भाजपा में शामिल हो गए हैं। यह प्रस्ताव भाजपा द्वारा 30 जुलाई को होने वाले दतिया उपचुनाव के एक दिन बाद आया है, जिसमें आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित किया गया था। इससे मिश्रा समर्थकों में विरोध की लहर दौड़ गई है।










