राम मंदिर चढ़ावे का मामला: दिग्विजय सिंह ने कोर्ट जाने का फैसला लिया
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर में चढ़ाए गए चंदे की गड़बड़ी को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं और कहा है कि वह इस मामले में अयोध्या की अदालत में मुकदमा दर्ज करेंगे। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने 1.11 लाख रुपये का चंदा वापस लेने का निर्णय लिया है, क्योंकि उन्हें विश्वास है कि उनके योगदान का दुरुपयोग किया गया है। सिंह ने यह भी कहा कि यह मामला उनकी धार्मिक आस्था को चोट पहुंचाने वाला है और वह न्याय की गुहार लगाने के लिए तैयार हैं।
चंदा गबन का आरोप और भगवान राम में आस्था का सवाल
दिग्विजय सिंह ने बताया कि उन्होंने राम मंदिर के लिए दो बार चंदा अभियान में भाग लिया था। पहली बार जब लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) की रथ यात्रा निकली थी, तब भी उन्होंने योगदान दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें भगवान राम और राम मंदिर में गहरी आस्था है, लेकिन पहली बार जुटाए गए चंदे का हिसाब कभी नहीं दिया गया। जब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राम जन्मभूमि विवाद में फैसला सुनाया, तब फिर से चंदा अभियान शुरू हुआ, जिसमें विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने भाग लिया। सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इन चंदों में विश्वास नहीं किया और सीधे ट्रस्ट को दान किया, क्योंकि उन्हें गबन की आदत पर संदेह था।
चंदे की गबन और ट्रस्ट प्रबंधन पर आरोप
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे चंपत राय (Champat Rai) ने कर्मचारियों को 10 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन पर नियुक्त किया था, जबकि दान के पैसे का 10 से 20 प्रतिशत हिस्सा गायब हो जाता था। उन्होंने कहा कि नकदी के गबन की घटनाएं आम हो गई थीं, और इसमें बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत भी सामने आई है। सिंह ने कहा कि यह सब उनकी आस्था और भगवान राम के प्रति श्रद्धा को चोट पहुंचाने वाला है। उन्होंने यह भी कहा कि वह अदालत का रुख करेंगे और अपने दान की राशि वापस मांगेंगे।










