2007 के फर्जी पुलिस एनकाउंटर का मामला फिर सुर्खियों में
बिहार के मुजफ्फरपुर में 19 साल पुराने फर्जी पुलिस एनकाउंटर का मामला फिर से चर्चा में आ गया है, जो भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर की खबरों के बीच सामने आया है। इस मामले में तत्कालीन सदर थाना प्रभारी और वर्तमान डीएसपी राजेश शर्मा का नाम फिर से चर्चा का विषय बन गया है। साथ ही, इस विवादित केस की सुनवाई भी अब मुजफ्फरपुर की अदालत में शुरू हो चुकी है।
मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 को निर्धारित
अदालत ने इस जटिल मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई 2026 की तारीख तय की है। पिछले दो दिनों से इस प्रकरण पर सुनवाई चल रही है, जिसके बाद यह मामला फिर से सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बन गया है। इस केस की सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार और उनके वकील न्याय की उम्मीद जता रहे हैं।
मामले का इतिहास और न्यायिक प्रक्रिया
यह पूरा विवाद 4 नवंबर 2007 का है, जब आरोप है कि ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के एमआईटी के पास पुलिस मुठभेड़ में 16 वर्षीय मनीष महिवाल, 22 वर्षीय मुकुल ठाकुर और 25 वर्षीय सुबोध कुमार सिंह की मौत हो गई थी। पुलिस ने इसे मुठभेड़ बताया, लेकिन मृतकों के परिजन इसे फर्जी एनकाउंटर करार देते हैं।
मनीष महिवाल की मां अनीता देवी का आरोप है कि पुलिस ने उनके बेटे को पूछताछ के नाम पर घर से उठाया था, और अगले दिन ही उन्हें मुठभेड़ में मारे जाने की खबर मिली। उन्होंने कहा कि उनके बेटे को हिरासत में लेने के बाद ही हत्या कर दी गई। इस मामले में उन्होंने अदालत और मानवाधिकार आयोग का सहारा लिया, और अब इसकी सुनवाई फिर से चल रही है।
मामले की जांच CID (Criminal Investigation Department) ने की थी, लेकिन मानवाधिकार आयोग उसकी रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं था। आयोग ने 2012 में मृतकों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। इसके बाद, 2013 में अनीता देवी ने अदालत में परिवाद दाखिल किया, जो अभी भी न्यायिक प्रक्रिया में है।
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 जुलाई 2026 की तारीख तय की है, जिसमें पीड़ित परिवार की ओर से भी कोर्ट में उपस्थित रहकर न्याय की उम्मीद जताई गई है। मानवाधिकार अधिवक्ता का कहना है कि न्यायपालिका इस मामले को गंभीरता से ले रही है, और पीड़ित परिवार को उचित न्याय मिलेगा।
वहीं, भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद सामने आए डीएसपी राजेश शर्मा के नाम के प्रकाशन के बाद अनीता देवी ने कहा कि उनके बेटे के मामले में भी निष्पक्ष न्याय होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में कोई पुलिस अधिकारी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।










