मध्य प्रदेश में बीजेपी का ‘लेटर’ विवाद गरमाया
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक विवादित पत्र को लेकर चर्चा में आ गई है। राज्य के एक मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक कथित पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपने विकास कार्यों में हो रही अनदेखी का आरोप लगाया है। इस पत्र के कुछ अंश सोशल मीडिया पर वायरल हो गए हैं, जिनमें ‘असहयोग’ और ‘उपेक्षा’ का जिक्र है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे पार्टी के अंदर चल रही आंतरिक कलह का संकेत माना है।
विजयवर्गीय का बयान और राजनीतिक प्रतिक्रिया
एक प्रमुख हिंदी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट के आधार पर जब पत्रकारों ने विजयवर्गीय से इस पत्र के बारे में पूछा, तो उन्होंने जवाब दिया, “मुझे नहीं पता कि यह पत्र कहां से आया है। आपको इस बारे में अखबार वालों से ही पूछना चाहिए कि यह सच है या झूठ।” वहीं, राज्य कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर इस रिपोर्ट की क्लिपिंग साझा की, जिसमें कथित पत्र के अंश दिखाए गए हैं और बीजेपी पर निशाना साधा गया है।
पत्र में क्या लिखा गया और राजनीतिक हलचल
इस कथित पत्र में विजयवर्गीय ने आरोप लगाया है कि उनके गृह जिले इंदौर के विकास में अनदेखी की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में उन्हें केवल ‘असहयोग’, ‘उपेक्षा’ और ‘विरोध’ का सामना करना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शहर के विकास से जुड़े मुद्दों का समाधान नहीं हुआ, तो वह सार्वजनिक मंच से इंदौर के लोगों की आवाज उठाएंगे।
पत्र में विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री यादव को 20 जून को लिखे गए पत्र में इंदौर के मास्टर प्लान में देरी, उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में इंदौर के नाम को कमतर करने और अन्य विकास परियोजनाओं जैसे मुद्दों का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा, “राज्य के मुखिया और मेरे गृह जिले के प्रभारी मंत्री के रूप में मुझे आपसे सहयोग की उम्मीद थी, लेकिन पिछले दो वर्षों में केवल उपेक्षा और विरोध ही मिला।” साथ ही, उन्होंने कहा कि विभाग में तबादले उनकी जानकारी के बिना किए जा रहे हैं और इंदौर के विकास को गति नहीं मिल रही है।
विपक्षी कांग्रेस ने इस कथित पत्र को बीजेपी के अंदर गुटबाजी का प्रतीक बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार और अन्य नेताओं ने इसे पार्टी के अंदर चल रही कलह का संकेत माना है। कांग्रेस का आरोप है कि इन सबके कारण जनता को नुकसान हो रहा है।
कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने इस पत्र को बीजेपी सरकार के अंदरूनी विवाद का ‘सार्वजनिक प्रमाण’ करार देते हुए मुख्यमंत्री यादव से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि यदि कैलाश विजयवर्गीय को यह लिखना पड़ा कि उन्हें पिछले दो सालों से केवल असहयोग और विरोध का सामना करना पड़ा, तो यह सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह पत्र सरकार के भीतर तालमेल की कमी और मुख्यमंत्री यादव के नियंत्रण की कमजोरी को दर्शाता है। साथ ही, उन्होंने कहा कि इस विवाद से बीजेपी की विकास की दावों की भी पोल खुलती है। कांग्रेस ने इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों का भी जिक्र किया और इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया।
पटवारी ने सवाल किया कि विजयवर्गीय ने अपनी जिम्मेदारी से क्यों चुप्पी साध रखी है और यदि उन्हें सरकार में अनदेखी महसूस हो रही थी, तो उन्हें इस्तीफा क्यों नहीं देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि यह पत्र बीजेपी के अंदर बढ़ती नाराजगी और आंतरिक कलह का खुलासा है, जो सरकार के भरोसे को कमजोर कर रहा है।










