दिल्ली में मॉनसून की जल्द शुरुआत की उम्मीद
गर्मी से बेहाल दिल्लीवासियों के लिए राहत की खबर है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून अगले 2-3 दिनों में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में प्रवेश करेगा। इससे पहले, अनुमानित तौर पर 27 जून को ही दिल्ली में मानसून की शुरुआत हो जाती है, लेकिन इस बार इसमें थोड़ी देरी हुई है। अब, 3-4 जुलाई तक दिल्ली में मानसून के आने की संभावना है, जिससे गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है।
मॉनसून कब पहुंचेगा दिल्ली और आसपास के इलाकों में?
मौसम विभाग के ताजा अपडेट के अनुसार, अगले कुछ दिनों में मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में मानसून की प्रगति की अच्छी संभावना है। दिल्ली में 1 जुलाई को बादल छाए रहने और शाम तक हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। वहीं, 3-4 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश के साथ मानसून का आगमन हो सकता है। इस समय दिल्ली में उमस भरी गर्मी का प्रकोप जारी है, लेकिन बारिश के साथ तापमान में गिरावट आने की उम्मीद है।
मॉनसून की देरी और मौसम की वर्तमान स्थिति
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस साल मानसून की शुरुआत में देरी हुई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की मुख्य ट्रफ (निम्न दबाव वाली लाइन) पंजाब से उत्तर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इस ट्रफ के कारण उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में मानसून पहुंच चुका है। साथ ही, बंगाल की खाड़ी पर एक चक्रवाती हवा का घेरा बना हुआ है, जो पश्चिम की ओर बढ़ रहा है। इससे बिहार से लेकर उत्तर पंजाब तक अच्छी बारिश की संभावना है।
मौसम विभाग के अनुसार, 2 या 3 जुलाई तक पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर राजस्थान में बारिश की गतिविधियां तेज हो जाएंगी। इस दौरान दिल्ली और आसपास के इलाकों में मानसून 3 या 4 जुलाई के आसपास पहुंच सकता है। फिलहाल, दिल्ली में हल्की बारिश या बूंदाबांदी ही देखने को मिल रही है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान से आने वाली सूखी पछुआ हवाएं तापमान को बढ़ा रही हैं, जबकि अरब सागर से आ रही नमी वाली हवाएं बारिश लाने का प्रयास कर रही हैं। जब ये दोनों हवाएं मिलती हैं, तो बादल तो बनते हैं, लेकिन पर्याप्त नमी न होने के कारण बारिश नहीं हो पाती। दोपहर के समय जब बादल बनते हैं, तब तापमान अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच चुका होता है। यही वजह है कि अभी भी गर्मी और उमस का प्रकोप बना हुआ है।
मॉनसून ट्रफ, जो मानसून की रीढ़ की हड्डी के समान है, नमी वाली हवाओं को खींचकर पूरे क्षेत्र में बारिश का इंतजाम करता है। इस ट्रफ के अभाव में, इस साल जुलाई में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है।
जुलाई में कम बारिश की आशंका और मौसम का पूर्वानुमान
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने मासिक पूर्वानुमान में कहा है कि जुलाई महीने में पूरे देश में औसत से कम बारिश होने की संभावना है। विभाग के अनुसार, जुलाई में देशभर में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) का केवल 94 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है। LPA का अर्थ है 1971 से 2020 के बीच जुलाई में हुई औसत बारिश, जो लगभग 280.4 मिलीमीटर है।
IMD के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय मोहापात्रा ने बताया कि उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर, पूर्व-मध्य भारत और पूर्वी प्रायद्वीपीय क्षेत्र के कुछ हिस्सों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है।










