गंगा और कावेरी नदियों को जोड़ने का महत्व
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कर्नाटक में कहा कि यदि भारत में गंगा और कावेरी नदियों को आपस में जोड़ दिया जाए, तो देश की जल समस्या का समाधान संभव है। उन्होंने यह भी बताया कि यदि इन दोनों प्रमुख नदियों को जोड़ने का कार्य पूरा हो जाता है, तो भारत की जल आपूर्ति में कोई बाधा नहीं रहेगी।
नायडू ने अपने भाषण में जोर देते हुए कहा कि गोदावरी और कावेरी नदियों को जोड़ने से चार राज्यों-कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और तेलंगाना-की पेयजल आवश्यकताएं पूरी हो सकेंगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि इस परियोजना से जल संकट का स्थायी समाधान संभव है, जो देश के विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।
तुंगभद्रा परियोजना और जल संरक्षण की दिशा में कदम
मुख्यमंत्री ने तुंगभद्रा परियोजना के तहत 33 नए क्रेस्ट गेट्स के उद्घाटन के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि पहले राज्यों के बीच नदियों को जोड़ने का कार्य प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि 2024 में तुंगभद्रा बांध के 19वें गेट के बह जाने के बाद अब 33 नए गेट लगाए गए हैं, जिससे जल संरक्षण में मदद मिलेगी।
नायडू ने यह भी कहा कि जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक के मुख्यमंत्रियों ने किसानों के हित में मिलकर काम किया है। उन्होंने यह भी बताया कि नदियों को जोड़ने का यह प्रयास जल संकट से निपटने का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो किसानों और आम जनता दोनों के लिए फायदेमंद साबित होगा।
अल नीनो का प्रभाव और जल प्रबंधन की आवश्यकता
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अल नीनो के प्रभाव के कारण तुंगभद्रा और अलमट्टी जैसी नदियों में पर्याप्त पानी नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस साल जल का उपयोग सोच-समझकर करना जरूरी है और नदियों को आपस में जोड़ने की योजना पर तेजी से काम करना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि पहले राज्यों के भीतर ही नदियों को जोड़ना चाहिए, उसके बाद ही दूसरे राज्यों की नदियों को जोड़ने का कार्य शुरू किया जाना चाहिए। जल संरक्षण के इस प्रयास में तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मिलकर किसानों के हित में कदम उठाए हैं, ताकि जल संकट का स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जा सके।










