भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी की कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस घटना को लेकर एक याचिका मुख्य न्यायाधीश (CJI) के नाम भेजी गई है, जिसमें स्वतः संज्ञान लेने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भरत भूषण की मौत एक फर्जी मुठभेड़ का परिणाम है और इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
याचिका में क्या मांगे गए हैं?
यह याचिका वकील नरेंद्र मिश्रा द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है, जिसमें अदालत से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया है कि घटना की निष्पक्ष जांच के बिना सच्चाई का पता नहीं चल सकता। इसमें भरत भूषण तिवारी की मौत के मामले में हत्या का मुकदमा दर्ज करने और भारतीय दंड संहिता की धारा 103 के तहत कार्रवाई करने की भी मांग की गई है। साथ ही, याचिका में यह भी कहा गया है कि जांच स्वतंत्र एजेंसी जैसे सीबीआई (CBI) या विशेष जांच दल (SIT) के माध्यम से कराई जाए।
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भरत तिवारी के एनकाउंटर के विरोध में युवा सड़कों पर उतर आए हैं और उन्होंने कैंडल मार्च निकाला है। इसके अलावा, पटना में जेडीयू (JDU) की बैठक में नेताओं ने इस घटना पर चर्चा की और मामले की न्यायिक जांच का आदेश दिया है। पिता और भाई पर भी एफआईआर दर्ज होने के बाद अब मुखिया पर भी मामला दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री (CM) ने भोजपुर में इस घटना की न्यायिक जांच का आदेश दिया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि निष्पक्षता बनी रहे। पीड़ित परिवार और गवाहों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि वे बिना किसी दबाव के अपनी बात रख सकें।
पूरा मामला यह है कि भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के निवासी थे। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में सरकारी कार्यशैली और एक अधिकारी के एनकाउंटर को लेकर नाराजगी जाहिर की थी। पोस्ट वायरल होने के बाद पुलिस उनके घर पहुंची, जहां बातचीत के दौरान उन्होंने पिस्टल निकाल ली। इसके बाद हुई कार्रवाई में उन्हें गोली लगी और अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह एक फर्जी मुठभेड़ थी।









