दिल्ली में जीएसटी फर्जीवाड़े का बड़ा खुलासा
दिल्ली में जीएसटी धोखाधड़ी के एक बड़े मामले का पर्दाफाश करते हुए पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 128 करोड़ रुपये की कथित फर्जी इनवॉइसिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस जालसाजी में शामिल छह व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने शेल कंपनियों और नकली जीएसटी इनवॉइस का सहारा लेकर बिना किसी वास्तविक व्यापार के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का गलत लाभ उठाया।
छापेमारी और गिरफ्तारी के पीछे का कारण
पुलिस ने जानकारी दी कि 15 मई को दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी कर राज कुमार दीक्षित, अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद को गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई जीएसटी धोखाधड़ी के मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर की गई।
फर्जी कंपनी और नेटवर्क का खुलासा
यह मामला 24 मार्च को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) थाने में दर्ज हुआ था, जिसमें फर्जी फर्म एम/एस आरके एंटरप्राइजेज के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने के नाम पर उसके आधार कार्ड, पैन कार्ड, बिजली बिल और बायोमेट्रिक जानकारी का दुरुपयोग किया गया। जांच में पता चला कि सितंबर 2025 में बिना उसकी जानकारी के फर्जी कंपनी बनाई गई और इसके माध्यम से 128 करोड़ रुपये से अधिक का लेनदेन हुआ।
पुलिस ने बताया कि इस फर्जी कंपनी के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये का गलत इनपुट टैक्स क्रेडिट भी हासिल किया गया। डिजिटल साक्ष्यों जैसे जीएसटी रिकॉर्ड, बैंकिंग लेनदेन, ईमेल और तकनीकी निगरानी से पूरे नेटवर्क का पता चला। मुख्य साजिशकर्ता राज कुमार दीक्षित और फरार दिलीप कुमार हैं, जो दरियागंज से बड़े पैमाने पर फर्जी इनवॉइसिंग सिंडिकेट चला रहे थे।
पुलिस की जांच में पता चला कि इन शेल कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी बिलिंग, नकली जीएसटी लेनदेन और गलत आईटीसी क्लेम के लिए किया जाता था। आरोपियों ने कई बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और बिचौलियों के माध्यम से वित्तीय लेनदेन का ट्रेल छिपाने का प्रयास किया। अमर कुमार, विभाष कुमार मित्रा, नितिन वर्मा, मोहम्मद वसीम और आबिद जैसे आरोपी फर्जी कंपनियों का संचालन कर रहे थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों से 51.12 लाख रुपये नकद, 15 मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, कई सिम कार्ड, जाली मुहरें, नकली इनवॉइस और दो वाहन भी बरामद किए हैं। इन कंपनियों का इस्तेमाल फर्जी जीएसटी रिटर्न दाखिल करने, नकली बिल बनाने, फंड ट्रांसफर करने और नकद लेनदेन के बदले फर्जी इनवॉइस देने के लिए किया जाता था।
पुलिस इस रैकेट से जुड़े अन्य लाभार्थियों और कंपनियों की पहचान करने में लगी है और जांच जारी है।










