डिजिटल जालसाजी का नया रूप: फर्जी पुलिस रेड और वसूली का खेल
सोशल मीडिया और डेटिंग ऐप्स के माध्यम से अपराधियों ने नई धोखाधड़ी की रणनीति अपनाई है, जिसमें फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को फंसाया जाता है। इन अपराधियों का मुख्य उद्देश्य भरोसे का माहौल बनाकर फिरौती या पैसे की वसूली करना है। हाल ही में दिल्ली क्राइम ब्रांच ने ऐसे ही एक हनीट्रैप गैंग का पर्दाफाश किया है, जो Tinder (टिंडर) और QuackQuack (क्वैकक्वैक) जैसे लोकप्रिय डेटिंग प्लेटफार्मों का दुरुपयोग कर रहा था।
फर्जी प्रोफाइल और नकली पुलिस रेड का खेल
इस गिरोह के सदस्य लड़कियों के नाम से झूठी प्रोफाइल बनाते थे, जिनमें आकर्षक तस्वीरें और भरोसेमंद बातें शामिल होती थीं। इन प्रोफाइल्स के जरिए वे बातचीत शुरू करते, फिर मिलने का प्रलोभन देते। जब पीड़ित किसी सुनसान जगह या फ्लैट पर पहुंचता, तो वहां नकली पुलिसकर्मी का वेश धरे अपराधी उसका सामना करते। आरोपी खुद को पुलिस अधिकारी बताकर युवक को डराते और फिरौती की मांग करते। यदि रकम नहीं मिलती, तो युवक को फंसाकर उसके साथ गलत हरकत का आरोप लगाते।
पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारियां
इस पूरे मामले का खुलासा पीड़ित की शिकायत के बाद हुआ, जिसमें उसने बताया कि उसे ‘कीर्ति’ नाम की लड़की के साथ बातचीत के बाद जाल में फंसाया गया। युवक जब जनकपुरी पहुंचा, तो वहां उसकी मुलाकात हुई, लेकिन कुछ ही देर में पुलिस की वर्दी में आए अपराधियों ने उसे घेर लिया। उन्होंने खुद को पुलिसकर्मी बताकर युवक को धमकाया और फिरौती की मांग की।
जांच के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 मई को मुख्य आरोपी सुशील कुमार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें से दो अभी भी फरार हैं। गिरफ्तार आरोपियों में सुशील कुमार, दीपक उर्फ साजन, विनोद और नीरज त्यागी शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि ये गिरोह फर्जी पुलिस रेड का नाटक कर लोगों से पैसे वसूलता था।
पकड़े गए आरोपियों में से सुशील कुमार पहले भी इसी तरह के अपराध में जेल जा चुका है, जहां वह फर्जी पुलिस बनकर रेड की रकम में हिस्सा लेता था। इन अपराधियों का यह गिरोह लगातार नए तरीकों से लोगों को ठग रहा था, जिससे उनकी धोखाधड़ी की रणनीति और भी जटिल हो गई थी।











