दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए नई नीति लागू
दिल्ली सरकार ने वायु गुणवत्ता सुधारने और प्रदूषण को कम करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, वाणिज्यिक वाहनों पर पर्यावरणीय शुल्क (ECC) में वृद्धि कर दी गई है। इस नई नीति के तहत दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की लागत बढ़ जाएगी, जिससे डीजल वाहनों की आवाजाही पर प्रभाव पड़ेगा।
ECC में हुई वृद्धि और उसका उद्देश्य
नई व्यवस्था के अनुसार, कैटेगरी 2 (हल्के वाणिज्यिक वाहन) और कैटेगरी 3 (दो एक्सल ट्रक) के लिए ECC को ₹1,400 से बढ़ाकर ₹2,000 कर दिया गया है। वहीं, कैटेगरी 4 (तीन एक्सल ट्रक) और कैटेगरी 5 (चार एक्सल ट्रक और उससे ऊपर) के लिए यह शुल्क ₹2,600 से बढ़ाकर ₹4,000 कर दिया गया है। दिल्ली सरकार की ओर से जारी अधिसूचना को प्रदूषण नियंत्रण के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि यह कदम केवल राजस्व बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की अनावश्यक एंट्री को रोकने के लिए उठाया गया है।
प्रदूषण कम करने के लिए नई नीति का प्रभाव
यह निर्णय 29 अप्रैल को जारी हुआ, जिसमें कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की सिफारिशें शामिल हैं। CAQM ने ECC की दरों को संशोधित करने का प्रस्ताव दिया था ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की संख्या में कमी लाई जा सके। सरकार का मानना है कि इस संशोधित ECC का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण कम करने के साथ ही स्वच्छ और गैर-प्रदूषणकारी परिवहन विकल्पों को प्रोत्साहित करना है।
सिंह ने स्पष्ट किया कि दिल्ली अब अनावश्यक प्रदूषण का बोझ नहीं सह सकती। उन्होंने कहा, “ECC बढ़ाकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को प्रवेश के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी।” साथ ही, हर साल ECC में पांच प्रतिशत की वृद्धि तय की गई है, जो अप्रैल महीने से लागू होगी। इससे न केवल ECC की प्रभावशीलता बनी रहेगी, बल्कि महंगाई के प्रभाव को भी नियंत्रित किया जा सकेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रस्ताव को न्यायसंगत और संतुलित माना है, और साथ ही यह निर्देश भी दिया है कि जो वाहन दिल्ली में प्रवेश की आवश्यकता नहीं रखते, उन्हें एक्सप्रेसवे का उपयोग करना चाहिए। इससे वे ECC का भुगतान करने से बच सकते हैं और शहर में अनावश्यक ट्रैफिक और प्रदूषण का बोझ कम होगा। सरकार का मानना है कि 2015 में तय ECC को अपडेट करना आवश्यक था, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास और प्रभावी हो सकें।











