धार की भोजशाला विवाद पर हाई कोर्ट का फैसला
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला को लेकर हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सोमवार को सुनवाई शुरू हुई। इस मामले में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने हिंदू पक्ष की दलीलों को सुना। हिंदू वकीलों ने तर्क दिया कि यह संरचना कभी मस्जिद नहीं थी, बल्कि यह राजा भोज द्वारा निर्मित वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर है।
ASI की रिपोर्ट और विवादित ढांचे का इतिहास
अखिल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की वैज्ञानिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि वर्तमान ढांचा मंदिर के अवशेषों और स्तंभों का पुनः उपयोग कर बनाया गया है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि परिसर में संस्कृत श्लोकों वाले शिलालेख, हवन कुंड, मंडप और खंडित हिंदू मूर्तियां मौजूद हैं। यह संरचना 1034 ईस्वी में परमार राजा भोज ने बनवाई थी। आक्रमणकारियों ने प्रतीकों को मिटाने का प्रयास किया, लेकिन मूल चरित्र आज भी जीवंत है।
मुस्लिम पक्ष का विरोध और कोर्ट का रुख
मुस्लिम पक्ष ने इस मामले में अपनी आपत्तियों को दो घंटे तक रखा। उनके वकील ने अनुरोध किया कि हिंदू समुदाय की याचिका के समर्थन में पेश किए गए सभी दस्तावेजों की प्रतियां उन्हें भी उपलब्ध कराई जाएं। हाई कोर्ट ने इस प्रस्ताव को मंजूर करते हुए कहा कि सभी पक्ष अपनी आपत्तियां सुनाने के बाद विचार कर सकते हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि मंगलवार को इस मामले की सुनवाई जारी रहेगी।
ASI की रिपोर्ट के अनुसार, दो साल पहले किए गए वैज्ञानिक सर्वेक्षण में यह पाया गया कि विवादित ढांचा पहले परमार राजाओं के शासनकाल का था और मौजूदा संरचना मंदिर के ही हिस्सों का पुनः उपयोग कर बनाई गई है। परमार राजाओं ने नौवीं सदी से लेकर चौथी सदी तक मालवा क्षेत्र पर शासन किया था।
मुस्लिम पक्ष ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि ASI ने उनकी पिछली आपत्तियों को नजरअंदाज किया। उनका आरोप है कि सर्वेक्षण में विवादित परिसर के अंदर ‘चोर दरवाजे से रखी गई वस्तुओं’ को भी शामिल किया गया है।
ASI के आदेश के अनुसार, हिंदू समुदाय को हर मंगलवार को पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज अदा करने का अधिकार है। इस विवादित स्थल का इतिहास और वर्तमान स्थिति दोनों ही धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं, और कोर्ट इस मामले में निष्पक्ष निर्णय लेने की प्रक्रिया में है।









