दिल्ली हाईकोर्ट के बाहर केजरीवाल का भव्य स्वागत और सुरक्षा व्यवस्था
सोमवार का दिन दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के बाहर भारी भीड़ और मीडिया का जमावड़ा देखने को मिला। जैसे ही आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) की गाड़ी कोर्ट परिसर में दाखिल हुई, माहौल पूरी तरह से बदल गया। कैमरे उनकी ओर तेजी से घूम गए, समर्थक और पत्रकार उनके स्वागत में आगे बढ़ने लगे। सुरक्षा कर्मी भीड़ को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन लोगों का उत्साह देखते ही बन रहा था। अंदर केजरीवाल अपनी पत्नी और करीबी सहयोगी Bibhu Kumar के साथ मौजूद थे, जबकि बाहर का दृश्य पूरी तरह से अलग था।
कोर्ट परिसर में केजरीवाल का सामना और कानूनी प्रक्रिया का प्रारंभ
जैसे ही केजरीवाल गाड़ी से उतरे, उन्हें लगभग धकेलते हुए आगे बढ़ाया गया। पुलिसकर्मी रास्ता बनाने में लगे थे, और पत्रकार उनके सवालों का जवाब पाने की कोशिश कर रहे थे। मैं भी उस भीड़ का हिस्सा थी, और जैसे ही मौका मिला, मैंने उनसे पूछा कि वे जज से खुद को मामले से अलग करने की मांग क्यों कर रहे हैं। उन्होंने चलते-चलते ही जवाब दिया, “अंदर जाकर बात करूंगा, मामला अदालत में है।” इसके बाद वे आगे बढ़ गए।
कोर्ट परिसर में दाखिल होने के बाद सबसे पहले उन्हें एंट्री पास बनवाना पड़ा। यह सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन उस दिन भीड़ बहुत अधिक थी। वकील, कोर्ट स्टाफ और आसपास के लोग सब एक ही नजर से उन्हें देख रहे थे। उन्हें उस बिल्डिंग की ओर ले जाया गया जहां कोर्टरूम था, और उनके साथ उनकी कानूनी टीम मौजूद थी। सुरक्षा जांच के बाद माहौल थोड़ा शांत हुआ, लेकिन सभी की नजरें उनके ऊपर टिकी थीं।
केजरीवाल का कोर्टरूम में सामना और बहस का दौर
कोर्टरूम के बाहर इंतजार कर रहे समर्थकों और वकीलों की भीड़ थी। कुछ उनसे बातचीत कर रहे थे, तो कुछ सिर्फ उन्हें देख रहे थे। कई वकीलों ने उनके साथ सेल्फी लेने की कोशिश भी की। यह वह स्थान था जहां आमतौर पर बहुत औपचारिकता होती है, लेकिन उस दिन का माहौल अलग था। केजरीवाल शांतचित्त बैठे रहे, और लोगों को देखकर हल्की स्वीकृति दी। लंबा इंतजार होने पर उन्हें सीनियर वकील के चैंबर में ले जाया गया। लंच ब्रेक के बाद जब कोर्ट फिर से बैठी, तो वे फिर ऊपर आए, फिर कॉरिडोर और अंत में कोर्टरूम में दाखिल हुए।
जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, वे तुरंत उठकर आगे आए और हाईकोर्ट को बताया कि उन्होंने एक अर्जी दाखिल की है। इसी बीच सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने उन्हें बीच में रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब एक नाटक है और कहा कि जज से रिकूजल की मांग करने वाली सात अर्जियां दाखिल हुई हैं। मेहता का गुस्सा स्पष्ट था, और उन्होंने कहा कि यह पूरी संस्था पर हमला है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि केजरीवाल खुद बहस करना चाहते हैं, तो वकील को हटा दें। उन्होंने कहा, “यह कोर्ट थिएटर के लिए नहीं है।” केजरीवाल ने शांत लहजे में जवाब दिया कि ई-फाइलिंग की सुविधा न होने के कारण उन्होंने हार्ड कॉपी लायी है और वे खुद बहस के लिए तैयार हैं।
अंत में हाईकोर्ट ने अर्जियों को रिकॉर्ड पर लिया और पूछा कि सीबीआई (CBI) कब तक जवाब दे सकता है। मेहता ने कहा कि उनका जवाब अगले दिन ही तैयार है। अदालत ने कहा कि यदि कोई और भी रिकूजल की अर्जी देना चाहता है, तो वह दे सकता है, और सभी मामलों पर एक साथ सुनवाई होगी।
कोर्ट से बाहर केजरीवाल का शांत और संयमित रवैया
सुनवाई समाप्त होने के बाद केजरीवाल कोर्टरूम से बाहर निकले। मीडिया फिर से कॉरिडोर में जमा हो गई थी, लेकिन इस बार सुबह जैसी अफरा-तफरी नहीं थी। उन्होंने हाथ जोड़कर मीडिया से कहा कि मामला संवेदनशील है, इसलिए वे विस्तार से कुछ नहीं कहेंगे। उनके चेहरे पर हल्का सुकून था, और उन्होंने संकेत दिया कि वह अपने मुकदमे को खुद लड़ेंगे। इस बार वे खुद अपने कदमों से बाहर आए, और उनके चेहरे पर आत्मविश्वास झलक रहा था।











