मध्य प्रदेश में बिजली दरों में हुई बढ़ोतरी का प्रभाव
मध्य प्रदेश की जनता को महंगाई के नए झटके का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छू रही हैं। इसी क्रम में अब बिजली की कीमतों में भी वृद्धि कर दी गई है। विद्युत नियामक आयोग (MPERC) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई टैरिफ नीति जारी की है, जिसके तहत बिजली दरों में लगभग 4.80 प्रतिशत का इजाफा किया गया है। यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी, और इसका सीधा असर प्रदेश के लगभग डेढ़ करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
बिजली दरों में बढ़ोतरी का विवरण और राहत योजनाएं
हालांकि, आयोग ने निम्न दाब (एलवी-1) और ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए उनकी दरों में कोई बदलाव नहीं किया है। साथ ही, 100 यूनिट तक की बिजली खपत पर पहले जैसी ही रियायत जारी रहेगी। लेकिन, 150 यूनिट से अधिक खपत करने वाले उपभोक्ताओं को इस नई दर का सामना करना पड़ेगा। नई व्यवस्था के अनुसार, जैसे ही खपत 151 यूनिट का आंकड़ा पार करेगी, प्रति यूनिट दर के साथ-साथ फिक्स्ड चार्ज भी बढ़ जाएगा। फिक्स्ड चार्ज को 28 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये प्रति 0.1 किलोवॉट कर दिया गया है, जिससे उपभोक्ताओं का कुल बिल बढ़ने की संभावना है।
खर्च में बढ़ोतरी और पीक ऑवर्स का प्रभाव
विभिन्न खपत स्तरों के अनुसार, 150 यूनिट से अधिक खपत पर बिजली का बिल लगभग 1017 रुपये तक पहुंच सकता है, जो कि लगभग 4.94 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। वहीं, 200 यूनिट से अधिक खपत पर यह करीब 1696 रुपये हो सकता है, यानी लगभग 5.30 प्रतिशत का इजाफा। इसी तरह, 250 यूनिट पर बिल लगभग 2183 रुपये, 300 यूनिट पर 2668 रुपये और 400 यूनिट से अधिक खपत पर यह करीब 3689 रुपये तक पहुंच सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बढ़ोतरी खासतौर पर गर्मियों में अधिक प्रभावी होगी, जब एसी, कूलर और अन्य बिजली उपकरणों का उपयोग बढ़ जाता है।
इसके अतिरिक्त, नई दरों में टाइम ऑफ डे (TOD) व्यवस्था को भी लागू किया गया है। इसके तहत शाम 6 बजे से रात 10 बजे के बीच बिजली की खपत पर अधिक शुल्क लगेगा, जबकि दिन के समय बिजली का उपयोग सस्ता पड़ेगा। अनुमान है कि पीक टाइम में बिल 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। बिजली कंपनियों ने इस बढ़ोतरी के लिए 10.19 प्रतिशत का टैरिफ प्रस्ताव रखा था, जिसमें उनका तर्क था कि पिछले वित्तीय वर्ष में उन्हें लगभग 6044 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। हालांकि, आयोग ने इस प्रस्ताव को घटाकर केवल 4.80 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी है। इस नई दरों के लागू होने के बाद, मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं को अपने बिजली खर्च में बढ़ोतरी के लिए तैयार रहना चाहिए।










