हरियाणा में राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक जंग तेज
हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें से बीजेपी से संजय भाटिया और कांग्रेस से कर्मवीर बौद्ध प्रमुख हैं। बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नांदल के निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव में उतरने से कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा मंडरा रहा है। इस स्थिति में कांग्रेस ने अपने विधायकों को हिमाचल प्रदेश में शिफ्ट करने की योजना बनाई है, ताकि वे सुरक्षित रह सकें। इस तरह से राज्यसभा चुनाव में ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ की शुरुआत हो चुकी है।
सांख्यिकी और रणनीति के बीच मुकाबला
विधायकों की संख्या के आधार पर बीजेपी के संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल के बीच वोटिंग के जरिए फैसला होगा। कांग्रेस पहले ही दो बार राज्यसभा चुनाव में हार का सामना कर चुकी है, इसलिए इस बार वह सतर्क है। कांग्रेस के पास हरियाणा में पर्याप्त विधायकों की संख्या है, लेकिन बीजेपी की सक्रियता ने सियासी तनाव को बढ़ा दिया है। इसी कारण कांग्रेस ने अपने विधायकों को हिमाचल में शिफ्ट करने की रणनीति बनाई है, ताकि वे सुरक्षित रह सकें।
राजनीतिक समीकरण और चुनावी जंग
हरियाणा की दोनों राज्यसभा सीटें जीतने के लिए बीजेपी को 62 विधायकों का समर्थन चाहिए, जबकि उसके पास वर्तमान में केवल 48 विधायक हैं। एक सीट जीतने के बाद बीजेपी के पास 17 वोट बचेंगे, और दूसरी सीट के लिए उसे अतिरिक्त 14 वोटों की जरूरत होगी। यदि वह इन वोटों को इनेलो के दो विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों को अपने पक्ष में कर ले, तो भी उसे कुल 9 वोटों का जुगाड़ करना पड़ेगा। इस स्थिति में बीजेपी को कांग्रेस में सेंधमारी करनी ही होगी, जो उसकी मुख्य रणनीति बन गई है। वहीं, कांग्रेस अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद और पार्टी के वरिष्ठ नेता चंडीगढ़ में डेरा डाले हुए हैं, ताकि विधायकों को एकजुट किया जा सके। पार्टी ने अपने सभी 37 विधायकों को शुक्रवार को डिनर पर बुलाया है, जिसमें हिमाचल में शिफ्टिंग का फैसला लिया जाएगा। कांग्रेस का लक्ष्य है कि वह अपने उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध को जीत दिलाने के लिए कम से कम 31 प्रथम वरीयता वोट प्राप्त करे।











