बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों का खर्च और उसकी तुलना
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों ने अपने चुनाव प्रचार और अभियान पर भारी मात्रा में धनराशि खर्च की है। इस बार बीजेपी ने कुल 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए, जो पिछले चुनाव की तुलना में तीन गुना अधिक है। वहीं, कांग्रेस ने अपने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो उसकी जमा पूंजी का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा है। चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी ने अपने कुल खर्च का करीब 2 प्रतिशत ही चुनाव में लगाया है।
पिछले चुनाव की तुलना में खर्च में भारी बढ़ोतरी
2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने लगभग 54 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जबकि इस बार उसकी खर्च की राशि लगभग तीन गुना बढ़कर 146.71 करोड़ रुपये हो गई है। इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण चुनाव प्रचार में अधिक खर्च और स्टार कैंपेनर्स की यात्राओं का विस्तार है। बीजेपी ने प्रचार और विज्ञापन पर 43.53 करोड़ रुपये, स्टार कैंपेनर्स की यात्राओं पर 37.28 करोड़ रुपये और अन्य नेताओं की यात्राओं पर 4.44 करोड़ रुपये खर्च किए।
वहीं, कांग्रेस ने इस बार अपने चुनाव खर्च में वृद्धि की है, लेकिन उसकी कुल राशि 35.07 करोड़ रुपये ही रही। पार्टी ने अपने खर्च का बड़ा हिस्सा स्टार कैंपेनर्स की यात्राओं और सोशल मीडिया अभियानों पर लगाया। कांग्रेस ने अपने कुल खर्च का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा चुनाव में लगाया है, जबकि बीजेपी ने अपने जमा पूंजी का केवल 2 प्रतिशत खर्च किया है।
खर्च का विश्लेषण और विधायकों पर प्रभाव
रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी के पास चुनाव खत्म होने के बाद लगभग 7088.58 करोड़ रुपये की जमा पूंजी बची थी, जिसमें से उसने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए। इस हिसाब से बीजेपी ने अपनी कुल जमा पूंजी का लगभग 2 प्रतिशत ही चुनाव में लगाया। दूसरी ओर, कांग्रेस के पास चुनाव के बाद 89.13 करोड़ रुपये की बचत थी, और उसने 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए। इसका अर्थ है कि कांग्रेस ने अपनी जमा पूंजी का लगभग 28 प्रतिशत चुनाव में खर्च किया।
बिहार में बीजेपी ने 89 विधायकों को जीत दिलाई, जबकि कांग्रेस को केवल 6 सीटें मिलीं। इस हिसाब से बीजेपी ने प्रति विधायक लगभग 1 करोड़ 64 लाख रुपये खर्च किए, जबकि कांग्रेस को एक विधायक जीतने में लगभग 5 करोड़ 83 लाख रुपये का खर्च आया।
2020 के चुनाव की तुलना में इस बार दोनों दलों ने अपने प्रचार पर तीन गुना अधिक पैसा खर्च किया है, जो चुनावी रणनीति और प्रचार के बढ़ते महत्व को दर्शाता है।










