हरियाणा में वाटर प्यूरीफायर खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं
हरियाणा विधानसभा में प्रस्तुत सीएजी (कॉन्स्टिट्यूशनल ऑडिट ग्रुप) की रिपोर्ट ने सरकारी योजनाओं में गंभीर लापरवाही का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 4,000 इलेक्ट्रिक अल्ट्रावायलेट वाटर प्यूरिफायर (EUWP) की खरीदारी बिना आवश्यक सुविधाओं के की गई, जिसमें पानी का टैंक और बिजली कनेक्शन शामिल नहीं थे। इस खरीदारी पर लगभग 1.22 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन यह खर्च बेकार साबित हुआ।
खरीदारी के बाद भी नहीं हो सके पानी की आपूर्ति और फिटिंग
रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2024 तक केवल 1,489 EUWP ही चालू हो सके, जबकि शेष 2,511 यूनिट पानी टैंक, बिजली कनेक्शन और फिटिंग की कमी के कारण कार्यशील नहीं हो सके। इस दौरान, इन उपकरणों की गारंटी अवधि भी समाप्त हो चुकी है। सीएजी ने यह भी आरोप लगाया है कि विभाग ने बिना तकनीकी और भौतिक आधार की जांच किए ही इन उपकरणों की खरीद कर ली, जो प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है।
आधिकारिक योजनाओं में देरी और उपकरणों की खराब स्थिति का खतरा
जनवरी 2024 में विभाग ने पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विभाग से आवश्यक उपकरणों की सूची और लागत का अनुमान मांगा था। फरवरी और मई 2024 में भी संबंधित विभागों से लागत का आकलन किया गया, लेकिन नवंबर 2024 तक इन प्रस्तावों पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। अगस्त 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 559 प्राइमरी स्कूलों में पानी टैंक नहीं थे और 465 केंद्रों में बिजली कनेक्शन की कमी पाई गई। सीएजी ने निष्कर्ष निकाला है कि 2,511 EUWP में से लगभग आधे उपकरण खराब होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट में इन उपकरणों की जिम्मेदारी तय करने और जल्द से जल्द उन्हें चालू करने की सख्त सिफारिश की गई है।











