मध्य प्रदेश के मैहर में बच्चों के साथ हुई शर्मनाक घटना
मध्य प्रदेश के मैहर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोल दी है। जहां पूरा देश गणतंत्र दिवस के अवसर पर बच्चों को देश का भविष्य मानते हुए सम्मानित कर रहा था, वहीं मैहर के शासकीय हाई स्कूल भटिंगवा में इन मासूम बच्चों के आत्मसम्मान और स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया गया। गणतंत्र दिवस के विशेष कार्यक्रम के दौरान बच्चों को गरिमापूर्ण तरीके से भोजन कराने के बजाय उन्हें फटे पुराने नोटों और किताबों के पन्नों पर परोसा गया।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने किया आक्रोशित
इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में गहरा आक्रोश फैल गया है। वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि स्कूल के छात्र-छात्राएं कड़ाके की ठंड में खुले आसमान के नीचे जमीन पर बैठे हैं। उनके सामने न तो भोजन की थाली है और न ही सामान्य पत्तल का प्रयोग किया गया है। इसके विपरीत, स्कूल प्रबंधन ने पुरानी रद्दी कॉपियों के फटे पन्नों को फर्श पर बिछाकर बच्चों को उसी कागज पर भोजन कराया। मजबूरी में ये बच्चे चुपचाप गंदे कागज से खाना उठाकर खा रहे हैं।
स्वास्थ्य के लिए खतरनाक और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
यह मामला केवल प्रबंधन की लापरवाही का ही नहीं, बल्कि बच्चों की जान से खिलवाड़ का भी प्रतीक है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, किताबों और अखबारों में प्रयुक्त प्रिंटिंग स्याही में लेड (सीसा) और अन्य जहरीले रसायन पाए जाते हैं। जब गर्म भोजन इन कागजों से संपर्क करता है, तो ये रसायन पिघलकर खाने में मिल जाते हैं, जो बच्चों के शरीर में प्रवेश कर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों और पाचन तंत्र की समस्याओं का कारण बन सकते हैं। सवाल उठता है कि क्या स्कूल प्रशासन इतना भी जागरूक नहीं था कि वह इन मासूम बच्चों को इस खतरनाक स्थिति में डालने से पहले सोचता।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मिड-डे मील के लिए बर्तनों की खरीद और रखरखाव के लिए सरकार अलग से बजट आवंटित करती है। बावजूद इसके, इस तरह की घटना का होना भ्रष्टाचार और संवेदनहीनता का संकेत है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह बच्चों के बुनियादी अधिकारों का उल्लंघन है और यह दर्शाता है कि सरकारी तंत्र में बैठे कुछ लोग गरीब बच्चों को किस नजर से देखते हैं। इस शर्मनाक घटना के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं। जिला परियोजना समन्वयक (DPC) विष्णु त्रिपाठी ने कहा है कि वायरल वीडियो के आधार पर ब्लॉक संसाधन समन्वयक (BRC) को मौके पर जाकर रिपोर्ट तैयार करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार शिक्षकों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फिर भी, सवाल यह है कि क्या इन दोषियों पर की जाने वाली कार्रवाई भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोक पाएगी और क्या इन बच्चों को वह सम्मान वापस मिल पाएगा, जिसके वे हकदार हैं।











