पटना के जलाशय में प्रवासी पक्षियों का आकर्षण बढ़ा
बिहार में ठंड के आगमन के साथ ही राजधानी पटना के मुख्य सचिवालय के पास स्थित जलाशय फिर से प्रवासी पक्षियों का प्रमुख ठिकाना बन गया है। इस वर्ष मौसम की अनुकूलता और जलस्तर में सुधार के कारण यहां हजारों विदेशी और स्थानीय पक्षियों का जमावड़ा देखा जा रहा है।
सुबह और शाम के समय इस जलाशय में पक्षियों का कलरव पूरे वातावरण को जीवंत और मनमोहक बना रहा है। इन समयों में पक्षियों की चहचहाहट वातावरण को आनंदमय और आकर्षक बना देती है।
प्रवासी पक्षियों की संख्या में हो रहा इजाफा
इस बार ठंड के शुरू होते ही पटना के जलाशय में लगभग चार से पांच हजार प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति दर्ज की गई है। स्वच्छ वातावरण, पर्याप्त जलस्तर और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता ने दूर-दराज से आने वाले पक्षियों को यहां आकर्षित किया है।
जलाशय के चारों ओर फैली हरियाली और शांतिपूर्ण माहौल इन पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय प्रदान कर रहा है। यहां कांब डक, लालसर, गडवाल, कूट, पिनटेल, लेसर विसलिंग डक जैसी कई प्रवासी प्रजातियां देखी जा रही हैं। साथ ही स्थानीय पक्षियों में हाउस क्रो, कॉमन मैना, एशियन कोयल, स्पॉटेड डव और कॉलर्ड डव की भी अच्छी संख्या मौजूद है। इन पक्षियों का मिलकर गूंजता कलरव जलाशय की सुंदरता को और निखार रहा है।
विदेशी पक्षी भी पहुंच रहे हैं पटना
राजधानी जलाशय की खास बात यह है कि यहां आने वाले कई प्रवासी पक्षी उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, ब्राजील (Brazil), ईरान, अफगानिस्तान, रूस (Russia), चीन, तिब्बत और उत्तरी यूरोप जैसे देशों से हजारों किलोमीटर की यात्रा कर पटना पहुंचते हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जलाशय का बेहतर प्रबंधन, पर्याप्त जलस्तर और प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता इन पक्षियों की संख्या में वृद्धि का मुख्य कारण हैं। पानी की उपलब्धता से जलीय वनस्पतियां और कीट-पतंगे पनपते हैं, जो पक्षियों के लिए प्राकृतिक भोजन का स्रोत हैं। मानवीय हस्तक्षेप में कमी और शांत वातावरण भी इन पक्षियों को यहां रुकने के लिए प्रेरित करता है।
इन दिनों राजधानी जलाशय प्रकृति प्रेमियों और मॉर्निंग वॉक करने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया है। लोग दूरबीन और कैमरे के साथ इन पक्षियों का अवलोकन कर रहे हैं। यह दृश्य न केवल पटना की सुंदरता को बढ़ा रहा है, बल्कि जैव विविधता संरक्षण का भी संदेश दे रहा है।










