कूनो नेशनल पार्क में दुर्लभ पक्षी की खोज
कूनो नेशनल पार्क अब एक नई उपलब्धि का साक्षी बना है, जहां दुनिया के सबसे दुर्लभ शिकारी पक्षियों में से एक ‘फॉरेस्ट आउलेट’ का पता चला है। यह क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार का संकेतक माना जा रहा है।
फॉरेस्ट आउलेट की खोज और संरक्षण स्थिति
यह पक्षी पहली बार 1872 में खोजा गया था, लेकिन 1884 के बाद इसे विलुप्त मान लिया गया था। लगभग 113 वर्षों के बाद 1997 में महाराष्ट्र के नंदुरबार जिले में फिर से इसकी खोज हुई, जिसने पक्षी विज्ञान में हलचल मचा दी। वर्तमान में यह मध्य भारत के खंडित वन क्षेत्रों में पाया जाता है, जिनमें मध्यप्रदेश (खकनार, पीपलोद), महाराष्ट्र (तोरणमाल, मेलघाट) और गुजरात (डांग, पूर्णा वन्य जीव अभयारण्य) शामिल हैं।
प्रजाति की पहचान और वर्तमान स्थिति
मध्यप्रदेश में फॉरेस्ट आउलेट पहले केवल पूर्वी खंडवा, बुरहानपुर और बैतूल जिलों में ही देखा जाता था। इसे सबसे पहले कूनो में स्थानीय पर्यटक लाभ यादव ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान देखा, जिससे इसकी सीमित वितरण और संरक्षण की आवश्यकता स्पष्ट हुई। वाइल्ड लाइफ रिसर्च एंड कंजर्वेशन सोसायटी (पुणे) के विवेक पटेल ने इसकी पुष्टि की, जिससे यह कूनो का पहला प्रामाणिक रिकॉर्ड बन गया। यह पक्षी मुख्य रूप से दिन में सक्रिय रहता है और सुबह 6 से 10 बजे के बीच सबसे अधिक देखा जाता है। वर्तमान में इसे ‘लुप्त प्राय’ श्रेणी में रखा गया है, और इसकी वैश्विक वयस्क संख्या लगभग 250 से 999 के बीच अनुमानित है। यह प्रजाति पर्यावास के क्षरण और विखंडन का सामना कर रही है, जिससे संरक्षण की आवश्यकता और बढ़ गई है।











