सीहोर में VIT यूनिवर्सिटी का हिंसक प्रदर्शन और प्रशासनिक कदम
मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित VIT (Vellore Institute of Technology) यूनिवर्सिटी में छात्रों के उग्र विरोध और तोड़फोड़ की घटनाओं ने प्रशासनिक व्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस हिंसक प्रदर्शन में करीब तीन से चार हजार छात्र शामिल हुए, जिन्होंने कॉलेज परिसर और आस-पास की गाड़ियों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में भोजन और पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण कई छात्र बीमार पड़ रहे हैं और उनमें पीलिया जैसे लक्षण दिख रहे हैं।
रातभर चली आगजनी के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और चश्मदीदों की रिपोर्ट के अनुसार, एक बस, दो चार पहिया वाहन, एक एंबुलेंस, हॉस्टल की खिड़कियों के शीशे, एक RO (Reverse Osmosis) प्लांट और अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। घटना की जानकारी मिलते ही आष्टा के SDOP (Sub-Divisional Officer of Police) और कई पुलिस थानों से सुरक्षाकर्मी तुरंत कॉलेज परिसर पहुंचे। पुलिसकर्मियों ने छात्रों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं और आश्वासन दिया कि आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पुलिस अधिकारी आकाश अमलकर ने बताया कि हालात अभी नियंत्रण में हैं और कॉलेज प्रशासन ने 30 नवंबर तक छुट्टी घोषित कर दी है। वहीं, सीहोर के एसपी दीपक शुक्ला ने कहा कि स्थिति सामान्य है और कुछ छात्र घर लौट रहे हैं। पुलिस ने हॉस्टल में रह रहे छात्रों से उनकी समस्याओं और बीमार छात्रों की जानकारी लेने के लिए एप्लिकेशन भी शुरू किया है।
इस बीच, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस घटना को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने ‘X’ (पूर्व में Twitter) पर पोस्ट कर दावा किया कि VIT में पीलिया का संक्रमण तेजी से फैल रहा है और कई छात्र भोपाल, आष्टा और सीहोर के अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि यह न केवल एक शैक्षिक समस्या है बल्कि सरकार और सिस्टम की भी नाकामी का प्रतीक है।
शिक्षा व्यवस्था और छात्र हितों का सवाल
पटवारी ने आरोप लगाया कि यदि इतनी भारी फीस लेने के बावजूद भी संस्थान छात्रों को मूलभूत सुविधाएं जैसे साफ पानी और शुद्ध भोजन नहीं दे सकता, तो इसे अपराध माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार छात्रों की आवाज दबाने का प्रयास कर रही है, और कांग्रेस उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करेगी। इस घटना ने प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था और छात्र सुरक्षा के मुद्दे को फिर से उजागर कर दिया है, जो सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है।









