खेल मैदानों की सुरक्षा में खामियां सामने आईं
जिला खेल अधिकारी सतेंद्र कुमार ने बास्केटबॉल खिलाड़ियों की दुखद मौत के मामले में कहा कि घटना स्थल पर मौजूद मैदान मूल रूप से स्कूल की संपत्ति है, जहां विभाग केवल रेसलिंग सेंटर संचालित करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह हादसा उस मैदान का हिस्सा है, जो स्कूल की जमीन पर बना है।
अधिकारी के अनुसार, स्थानीय निवासियों और अभिभावकों ने बताया कि कुछ बच्चे उस पोल पर चढ़ गए थे, जो पहले से ही कमजोर था। अचानक वह पोल टूटकर गिर गया, जिससे एक खिलाड़ी की जान चली गई। यह घटना खेल विभाग की लापरवाही को उजागर करती है और इसे बहुत ही गंभीर माना जा रहा है।
पोल की खराब स्थिति और सुरक्षा उपायों का अभाव
सतेंद्र कुमार ने बताया कि लाखन माजरा में भी इसी तरह का एक पोल गिरने की घटना हुई थी, जिसमें एक खिलाड़ी की मौत हो गई थी। इस तरह की दो घटनाओं ने सिस्टम की सुरक्षा खामियों को स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा कि पोल बहुत पुराने थे और इनकी मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई थी, जिससे यह हादसा हुआ।
घटना के तुरंत बाद एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है, जिसमें बास्केटबॉल कोच, स्टेडियम इंचार्ज और राजीव गांधी स्टेडियम के वरिष्ठ कोच शामिल हैं। यह कमेटी सभी खेल मैदानों, उपकरणों और खासकर पुराने पोलों की जांच कर रही है। विभाग ने संकेत दिया है कि अब सभी मैदानों की पूरी तरह से जांच की जाएगी और खराब उपकरणों को हटा दिया जाएगा। साथ ही, नए पोल लगाने के लिए आवश्यक फंड की भी मांग की जाएगी।
सुरक्षा सुधारों पर जोर, भविष्य में हादसों से बचाव का प्रयास
अधिकारी ने स्पष्ट किया कि इन घटनाओं को दोहराने से रोकने के लिए विभाग की व्यवस्था में सुधार जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुराने पोलों की मरम्मत और नए पोल लगाने का कार्य प्राथमिकता से किया जाएगा। विभाग का लक्ष्य है कि खेल मैदानों की सुरक्षा सुनिश्चित कर, खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।











