भारत और साइप्रस के बीच मजबूत मित्रता का इतिहास
भारत और साइप्रस के संबंधों की शुरुआत बहुत पुरानी है, जो स्वतंत्रता प्राप्ति के तुरंत बाद 1962 में हुई थी। उस समय से दोनों देशों ने अपने राजनैतिक और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत किया है। आज भी, जब दोनों देश विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर एक साथ खड़े होते हैं, तो यह दोस्ती और भी गहरी हो जाती है। चाहे वह संयुक्त राष्ट्र हो, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई हो या मानवाधिकारों का संरक्षण, भारत और साइप्रस का सहयोग निरंतर बढ़ रहा है।
साइप्रस की विदेश नीति और तुर्किये पर निशाना
साइप्रस के विदेश मंत्री कॉन्स्टेटिनोस कोम्बोस ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान तुर्किये पर स्पष्ट रूप से निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उनके देश पर एक आक्रामक शक्ति का दबाव है, जो साइप्रस के क्षेत्रीय विवाद का कारण भी है। साइप्रस का तुर्किये के साथ सीमा विवाद लंबे समय से चला आ रहा है, और यह तनाव दोनों देशों के बीच संबंधों को प्रभावित कर रहा है। इस संदर्भ में, साइप्रस का यह बयान क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चिंता का विषय बन गया है।
आशावादी दृष्टिकोण और भविष्य की योजनाएँ
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने साइप्रस के साथ भारत के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने का संकेत दिया है। उन्होंने भरोसेमंद मित्रता और दीर्घकालिक साझेदारी का जिक्र करते हुए कहा कि यह रिश्ता आज के समय में बहुत महत्वपूर्ण है। साथ ही, साइप्रस के आगामी यूरोपीय संघ (EU) अध्यक्षता को लेकर भी भारत ने शुभकामनाएँ दी हैं। दोनों देश मिलकर वैश्विक मंचों पर अपने हितों को बढ़ावा देने और यूरोप-एशिया के बीच संपर्क मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।











