पेरिस के प्रसिद्ध लूवर म्यूजियम में चोरी का मामला
पेरिस के विश्वप्रसिद्ध लूवर म्यूजियम, जहां मोना लिसा जैसी विश्व प्रसिद्ध पेंटिंग्स और ऐतिहासिक वस्तुएं रखी हैं, आज (रविवार) बंद कर दिया गया है। फ्रांस की एक मंत्री ने इस म्यूजियम में हुई चोरी की खबर साझा की, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। अभी तक म्यूजियम ने आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार नेपोलियन के जमाने के गहनों की चोरी हुई है।
चोरी का कारण और जांच प्रक्रिया
इस प्रतिष्ठित म्यूजियम के अचानक बंद होने का कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन फ्रांस की संस्कृति मंत्री रचिदा दाती ने सुबह ही चोरी की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, “आज सुबह लूवर म्यूजियम के खुलने के समय चोरी हुई। किसी को चोट नहीं पहुंची है। मैं मौके पर स्टाफ और पुलिस के साथ हूं।” पुलिस की टीम ने मामले की जांच शुरू कर दी है और चोरी गए सामान का मूल्यांकन कर रही है।
चोरी का तरीका और संदिग्ध गतिविधियां
पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि चोर छोटे चेनसॉ उपकरण के साथ स्कूटर पर आए थे। उन्होंने उस कमरे में प्रवेश किया, जहां चोरी हुई, उसके लिए एक सामान ढोने वाली लिफ्ट का इस्तेमाल किया। फ्रांस के अखबार ले पेरिसियन के अनुसार, चोरों ने सीन नदी के किनारे से म्यूजियम में प्रवेश किया और फिर अपोलो गैलरी के कमरे तक पहुंचने के लिए लिफ्ट का सहारा लिया। उन्होंने खिड़कियां तोड़कर अंदर घुसपैठ की और कथित तौर पर नौ गहने, जिनमें नेपोलियन और रानी के संग्रह से थे, चुरा लिए। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने पुष्टि की है कि इस घटना में बेहद कीमती गहने चोरी हुए हैं और यह पूरी वारदात केवल सात मिनट में पूरी हो गई। चोरी की कुल कीमत का आकलन अभी किया जा रहा है।
लूवर म्यूजियम का ऐतिहासिक महत्व और पिछली चोरी की घटनाएं
दुनिया के सबसे अधिक देखे जाने वाले म्यूजियम में से एक लूवर हर दिन लगभग 30,000 दर्शकों का स्वागत करता है। इसमें 33,000 से अधिक कलाकृतियां मौजूद हैं, जिनमें प्राचीन वस्तुएं, मूर्तियां और पेंटिंग्स शामिल हैं। इस म्यूजियम का सबसे बड़ा आकर्षण मोना लिसा है। रविवार को हुई चोरी के दौरान अपोलो गैलरी में फ्रांस के शाही रत्नों का संग्रह रखा था। उल्लेखनीय है कि इस म्यूजियम में पहले भी कई बार चोरी की घटनाएं हुई हैं। सबसे प्रसिद्ध चोरी 1911 में हुई, जब लियोनार्डो दा विंची की ‘मोना लिसा’ को एक कर्मचारी ने चुरा लिया था, जिसे दो साल बाद बरामद किया गया। इसके अलावा 1983 में पुनर्जागरण काल के दो कवच चोरी हुए थे, जो 2021 में वापस मिले।











