मथुरा के विश्व प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में खजाने का कमरा खुला
मथुरा के प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में लंबे समय से बंद पड़े खजाने के कमरे को आज धनतेरस के अवसर पर खोल दिया गया है। इस ऐतिहासिक घटना के दौरान मंदिर परिसर में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है और सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इस पल को लेकर अत्यंत उत्साहित हैं, क्योंकि यह कमरा करीब पचास वर्षों से बंद था और इसे मंदिर का खजाना माना जाता है।
खजाने का कमरा खोलने की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था
मंदिर में मौजूद सेवायत गोस्वामी आभास गोस्वामी ने बताया कि गर्भगृह के ठीक सामने स्थित इस कमरे को पहले सुरक्षा कारणों से बंद कर दिया गया था। उस समय सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी, इसलिए ठाकुर जी की दैनिक उपयोग की वस्तुएं जैसे बर्तन, कलसे, स्नान सामग्री आदि इस कमरे में सुरक्षित रखी जाती थीं। इसके अलावा, चांदी और सोने के छोटे आभूषण स्टेट बैंक (State Bank) मथुरा में जमा कराए गए थे।
आज जब इस कमरे का ताला खोला गया, तो अंदर पानी भरा हुआ था और काफी कीचड़ जमा था। साथ ही, अंदर चूहे भी देखे गए। फिलहाल, सफाई का कार्य जारी है। प्रारंभिक जांच में अभी तक कोई कीमती वस्तु नहीं मिली है। गोस्वामी आभास ने कहा कि खजाने में जो भी सामग्री निकलेगी, वह ठाकुर जी की पूजा और सेवा के लिए उपयोग में आने वाली प्राचीन वस्तुएं होंगी, जैसे ताम्बे या चांदी के बर्तन, कलसे, स्नान सामग्री या पुराने आभूषण।
खजाने की खोज का ऐतिहासिक महत्व और आगे की योजना
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस खजाने में कभी भी ऐसा कोई खजाना नहीं रखा गया था, जो राजा या राज्य द्वारा जमा किया गया हो। अधिकांश सामग्री केवल ठाकुर जी की पूजा और सेवा के लिए ही रखी गई थी। जैसे ही सफाई का कार्य पूरा होगा, इन वस्तुओं को श्रद्धालुओं और मीडिया के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। मंदिर प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसी भी वस्तु को निकालने या व्यवस्थित करने से पहले सभी धार्मिक और सुरक्षा नियमों का पालन किया जाएगा।
मथुरा में इस ऐतिहासिक क्षण का महत्व न केवल श्रद्धालुओं के लिए है, बल्कि इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वालों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण अवसर है। लगभग आधी सदी बाद इस खजाने के खुलने की प्रक्रिया ने पूरे शहर में उत्सुकता और कौतूहल को बढ़ा दिया है।











