क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने विश्व कप में एक अनूठा रिकॉर्ड बनाया
पुर्तगाल के कप्तान क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने फीफा वर्ल्ड कप 2026 में एक नई मिसाल कायम की है। डीआर कांगो (DR Congo) के खिलाफ अपने पहले ग्रुप मैच में मैदान पर उतरते ही रोनाल्डो विश्व कप के इतिहास में सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बन गए। 41 वर्ष और 132 दिन की उम्र में उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में कदम रखा, जिससे उन्होंने कनाडा के पूर्व कप्तान अतीबा हचिन्सन का रिकॉर्ड तोड़ दिया। हचिन्सन ने 2022 के फीफा वर्ल्ड कप में क्रोएशिया (Croatia) के खिलाफ 39 वर्ष और 296 दिन की उम्र में मैच की शुरुआत की थी।
लंबे करियर और छह विश्व कप खेलने का रिकॉर्ड
रोनाल्डो ने अपनी लंबी और सफल फुटबॉल यात्रा का प्रदर्शन फिर से किया है, जो उनके अद्भुत फिटनेस और स्थिरता का परिचायक है। दो दशकों से अधिक समय से शीर्ष स्तर पर खेल रहे इस खिलाड़ी ने आज भी पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम में अपनी अहम भूमिका निभाई है। इस मैच के साथ ही, रोनाल्डो विश्व कप में छह बार भाग लेने वाले केवल दूसरे पुरुष फुटबॉलर बन गए हैं। इससे पहले यह उपलब्धि अर्जेंटीना (Argentina) के लियोनेल मेसी (Lionel Messi) ने हासिल की थी। रोनाल्डो का विश्व कप सफर 2006 में जर्मनी (Germany) से शुरू हुआ था, और उसके बाद उन्होंने 2010 (दक्षिण अफ्रीका), 2014 (ब्राजील), 2018 (रूस), 2022 (कतर), और अब 2026 (उत्तर अमेरिका) में हिस्सा लिया है।
मैच का परिणाम और रोनाल्डो की स्थिति
हालांकि रोनाल्डो की यह ऐतिहासिक उपलब्धि जीत में तब्दील नहीं हो सकी। ग्रुप K के मुकाबले में पुर्तगाल को डीआर कांगो (DR Congo) के साथ 1-1 की बराबरी पर संतोष करना पड़ा। टीम ने शुरुआत में अच्छा प्रदर्शन किया, लेकिन बढ़त को कायम नहीं रख सकी। कांगो ने शानदार वापसी करते हुए मैच को ड्रॉ पर समाप्त किया। रोनाल्डो के लिए यह मैच व्यक्तिगत रूप से निराशाजनक रहा, क्योंकि वह गोल करने में असमर्थ रहे और मैच के दौरान अधिक प्रभाव नहीं डाल सके। मजबूत रक्षा पंक्ति ने उन्हें खुलकर खेलने का मौका नहीं दिया। टीम ने गेंद पर नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन निर्णायक मौकों को गोल में बदलने में संघर्ष किया।
अभी भी रोनाल्डो का जादू कायम है
41 वर्ष की उम्र में भी रोनाल्डो विश्व फुटबॉल के सबसे बड़े सितारों में से एक हैं। उनकी फिटनेस, अनुशासन और निरंतरता युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई है। आने वाले मैचों में भी, पुर्तगाल और उनके प्रशंसक उम्मीद कर रहे हैं कि रोनाल्डो अपनी चमक बरकरार रखेंगे और टीम को नॉकआउट चरण तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। भले ही यह मैच ड्रॉ रहा हो, लेकिन रोनाल्डो ने फिर से साबित कर दिया कि उम्र केवल एक संख्या है। विश्व कप के इतिहास में सबसे उम्रदराज़ आउटफील्ड खिलाड़ी बनने का यह रिकॉर्ड उनके शानदार करियर का एक और सुनहरा अध्याय है।











