आर्टिफिशियल ज्वेलरी के वास्तु नियम और उपाय
आज के समय में बढ़ती महंगाई के कारण महिलाओं में आर्टिफिशियल गहनों का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है। ये गहने न केवल देखने में आकर्षक और सुंदर लगते हैं, बल्कि इनकी कीमत भी सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं की तुलना में काफी कम होती है। इसी वजह से अधिकतर महिलाएं इन्हें खरीदना पसंद करती हैं।
आर्टिफिशियल गहनों में विविध प्रकार के खूबसूरत डिजाइनों की उपलब्धता होती है, जो पहनने के बाद महिलाओं की सुंदरता को और निखार देते हैं। हालांकि, इन गहनों को पहनते समय वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करना जरूरी है, क्योंकि ये शरीर पर रहते हैं और आसपास की ऊर्जा को प्रभावित कर सकते हैं।
महंगे और रोजाना इस्तेमाल होने वाले गहनों का सही स्थान
यदि आप महंगे आर्टिफिशियल गहने खरीदकर उन्हें लंबे समय तक पहनने का विचार कर रही हैं, तो वास्तु के अनुसार इन्हें घर की उत्तर दिशा में रखना शुभ माना जाता है। ऐसा करने से गहने न केवल अच्छी स्थिति में रहते हैं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा भी बनी रहती है। यदि आप इन्हें अलमारी में रखते हैं, तो सुनिश्चित करें कि अलमारी उत्तर दिशा में हो और उसका मुख पूर्व दिशा की ओर हो।
रोजाना उपयोग में आने वाले सस्ते गहनों को, जैसे कान की बालियां या लॉकेट, उत्तर-पश्चिम दिशा में रखना उचित माना जाता है। इससे गहनों की ऊर्जा सही बनी रहती है और उनका उपयोग भी आसान हो जाता है।
गहनों की सफाई और रख-रखाव के वास्तु सुझाव
मान्यता है कि शरीर पर पहने जाने वाली हर वस्तु ऊर्जा को आकर्षित करती है। सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए जरूरी है कि गहने साफ-सुथरे और शुद्ध हों। नियमित रूप से आर्टिफिशियल गहनों की सफाई करें ताकि उनमें नकारात्मक ऊर्जा न जमे।
यदि कोई गहना टूट गया हो या खराब हो गया हो, तो उसे पहनने से बचें। माना जाता है कि टूटे और खराब गहने नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करते हैं। यदि संभव हो, तो उन्हें ठीक करवा लें, नहीं तो उन्हें त्याग देना ही बेहतर होता है।









