षटतिला एकादशी का महत्व और धार्मिक परंपराएँ
षटतिला एकादशी वर्ष 2026 में माघ मास के कृष्ण पक्ष की एक महत्वपूर्ण तिथि है, जिसमें तिल दान, व्रत और पूजा का विशेष महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और श्रद्धालु इसे श्रद्धा, संयम और दान के साथ मनाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए उपवास और दान से अनेक शुभ फल प्राप्त होते हैं। खासतौर पर इस एकादशी पर तिल का प्रयोग अत्यंत शुभ माना जाता है, जो पुण्य प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करता है।
षटतिला एकादशी का विशेष महत्व और तिल का प्रयोग
इस एकादशी का नाम ही इसकी विशेषता को दर्शाता है, जिसमें ‘षट’ का अर्थ है छह और ‘तिला’ का अर्थ है तिल। इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग करने का विधान है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु को तिल अत्यंत प्रिय है। तिल के प्रयोग से दरिद्रता दूर होती है, पापों का नाश होता है और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन तिल से स्नान, तिल का उबटन, हवन, दान, सेवन और पकवान बनाकर भगवान को भोग लगाना शुभ माना गया है। इन सभी क्रियाओं से मन शुद्ध होता है, नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
2026 में षटतिला एकादशी की तिथि और व्रत पारण का समय
षटतिला एकादशी का पर्व 14 जनवरी 2026 को बुधवार को मनाया जाएगा। इस दिन एकादशी तिथि दोपहर 3 बजकर 17 मिनट से शुरू होकर शाम 5 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। व्रत का पारण 15 जनवरी 2026 को सुबह 7 बजकर 15 मिनट से 9 बजकर 21 मिनट के बीच किया जा सकता है। यह तिथि और समय व्रत रखने और पूजा करने के लिए शुभ माना जाता है।











