गरुड़ पुराण में कर्मों का न्याय और सजा का वर्णन
प्राचीन भारतीय शास्त्रों में गरुड़ पुराण का उल्लेख है, जिसमें बताया गया है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्मों का फल भुगतना पड़ता है, चाहे वह इस जीवन में हो या परलोक में। यह ग्रंथ इस बात पर जोर देता है कि कोई भी व्यक्ति अपने कर्मों से नहीं बच सकता। गरुड़ पुराण में विस्तार से वर्णित है कि कर्मों के अनुसार किस तरह की सजा मिलती है और यह सजा कितनी कठोर हो सकती है।
महिलाओं पर गंदी नजर और दुष्कर्म की कठोर सजा
गरुड़ पुराण के अनुसार, जो पुरुष किसी अन्य की पत्नी या किसी महिला पर गंदी नजर डालते हैं और उनके साथ अवैध या जबरन संबंध बनाते हैं, उन्हें नरक में अत्यंत कड़ी सजा भुगतनी पड़ती है। इन व्यक्तियों को विशेष नरक में भेजा जाता है, जहां उन्हें लोहे की तपती महिला की प्रतिमा के साथ गले मिलाने जैसी यातनाएं दी जाती हैं। यह यातना इतनी पीड़ादायक होती है कि मृत्यु भी इससे छोटी प्रतीत होती है। लाखों वर्षों तक इन्हें इस नरक में कष्ट सहना पड़ता है।
नरक में अन्य यातनाएं और दंड की विस्तृत व्याख्या
इसके अतिरिक्त, इन व्यक्तियों को गरम, उबलते तेल की कड़ाही में डाला जाता है, जिससे आत्मा को अत्यधिक पीड़ा होती है। व्यभिचार में लिप्त पुरुषों को जहरीले सांपों और कांटेदार मकड़ियों से भी पीड़ित किया जाता है। गरुड़ पुराण में बताया गया है कि इन लोगों को लोहे के तप्त बिस्तर पर सुलाया जाता है और नुकीले कांटों और किलों से भरे रास्तों पर लाखों वर्षों तक चलना पड़ता है।











